वर्ष 2023 के बाद से 3600 करोड़ की औद्योगिक विकास की सौगात
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का दिन एक अलग चमक लेकर आया है। ब्रह्मा परियोजना के प्रति प्रतिबद्धता दिखाने के लिए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह एवं रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का आभारी हूं। जब से हमारी सरकार बनी है। वर्ष 2023 के बाद से 3600 करोड़ की औद्योगिक विकास की सौगात मिल गई है। बीईएमएल मूलरूप से रक्षा क्षेत्र के लिए कार्य करता है। अब भोपाल में मेट्रो शुरू होने से पहले उसके कोच निर्माण भी होने लगेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी ने नेतृत्व में डोकलाम जैसे मामले में भारत ने अपनी सुरक्षा के साथ पड़ोसियों की भी सुरक्षा की है। भारत अपनी उत्पादन क्षमता के साथ दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है। रायसेन जिले के उमरिया को और प्रदेश को आज एक बड़ी सौगात मिल रही है।
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ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में रक्षा उत्पादन के साथ रेलवे की गति भी बढ़ाई जा रही है। राज्य सरकार रोजगार परक उद्योग लगाने के लिए हर दूसरे दिन औद्योगिक विकास यात्रा को बढ़ा रही है। संभागीय स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के जरिए 38 हजार करोड़ की फैक्ट्रियों के लोकार्पण और भूमिपूजन कर चुके हैं। मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में देशभर के लोग रोजगार के लिए आते हैं। अब भारतीय रेलवे की सूरत बदली है। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया। भारतीय सेना ने पाकिस्तान के विमान गिराए हैं। राज्य सरकार नदी जोड़ो अभियान सहित सभी क्षेत्रों में विकास कार्य कर रही है।
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बाढ़-बारिश से प्रभावित लोगों की हर संभव मदद के लिए सरकार साथ
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश के साथ केन-बेतवा लिंक परियोजना पर कार्य शुरू हो गया है। एक लाख करोड़ की इस परियोजना से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल मिलेगा। पीकेसी परियोजना से मालवा क्षेत्र को भरपूर जल मिलेगा। औबेदुल्लागंज क्षेत्र के 5000 लोगों को रोजगार मिलेगा। बाढ़-बारिश से प्रभावित लोगों की हर संभव मदद के लिए सरकार साथ है। लोगों को पट्टे दिलाएंगे, मकान बनवाएंगे। स्कूल कॉलेज भी बनाएंगे। मध्य प्रदेश अपना उत्पादन बढ़ाते हुए स्वदेशी अभियान के लिए कृत संकल्पित है।
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मध्य प्रदेश बनेगा मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपोर्टिंग हब
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भारतीय रेलवे ने पिछले 11 वर्षों में अभूतपूर्व प्रगति की है। इस अवधि में 35 हजार किलोमीटर नई पटरियां बिछाई गईं, 51 हजार किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण हुआ और कई नई ट्रेनें शुरू की गईं। रेल मंत्री ने बताया कि अब तक 40 हजार से अधिक कोचों को लाइट वेट कोच में अपग्रेड किया गया है। उन्होंने कहा कि आज विकास की इस कड़ी में एक नया मोती जुड़ने जा रहा है, जो पीएम के स्वदेशी संकल्प का एक और उदाहरण है। उन्होंने घोषणा की कि मध्य प्रदेश को रेलवे के मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपोर्टिंग का केंद्र बनाया जाएगा। इस नई फैक्ट्री से 5000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। रेल मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य है कि "मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड" और यह परियोजना उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
भविष्य में रक्षा उत्पादों का निर्माण भी होगा
रेल हब फॉर मैन्युफैक्चरिंग इकाई के शिलान्यास कार्यक्रम में बीईएमएल के प्रेसिडेंट एंड सीएमडी शांतनु राय ने कहा कि बीईएमएल ने 61 साल से देश को रेल, खनन एवं महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है। वर्ष 1964 से बीईएमएल की शुरुआत हुई। यह कंपनी रक्षा, रेल और खनन क्षेत्र में कार्य़ करती है। बेंगलुरु में मेट्रो रेल कोच ईकाई स्थापित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में रक्षा और रेल क्षेत्र में नए-नए कीर्तिमान गढ़े गए हैं। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु के बाद बीईएमएल का उमरिया में दूसरा रेलवे कोट रोलिंग स्टॉक यूनिट है। कोशिश है कि 18 महीने में यहां से पहला स्टॉक रोल आउट करें। यहां अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए लाइट वेट एल्युमीनियम रेलवे कोच भी तैयार किए जाएंगे। ईकाई में सुरक्षा और पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाएगा। भविष्य में यहां रक्षा उत्पादों का निर्माण भी किया जाएगा। यह ईकाई सामाजिक बदलाव का केंद्र बनेगी और मेक इन इंडिया के विजन को मजबूत करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परियोजना के लिए भूमि आवंटन में तत्परता देखाने पर उनका आभार माना।
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मेक इन इंडिया के उद्देश्य के अनुरूप कार्य करेगा संयंत्र
‘ब्राह्मा’ संयंत्र पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करेगा। संयंत्र में उपयोग होने वाली अधिकांश तकनीक और सामग्री देश में विकसित व निर्मित की जाएगी, जिससे विदेशी निर्भरता कम होगी। यह परियोजना प्रदेश को रक्षा निर्माण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इस संयंत्र के निर्माण में पर्यावरणीय मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यहां शून्य तरल अपशिष्ट प्रणाली, सौर एवं नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, वर्षा जल संचयन और हरित लैंडस्केपिंग को अपनाया जाएगा। निर्माण में पुनर्नवीनीकृत और टिकाऊ सामग्री का प्रयोग करते हुए इसे हरित फैक्ट्री मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
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200 कोच का प्रतिवर्ष होगा निर्माण
परियोजना का प्रारंभिक उत्पादन क्षमता 125 से 200 कोच प्रतिवर्ष होगी, जिसे पांच वर्षों में बढ़ाकर 1,100 कोच प्रतिवर्ष किया जाएगा। इस इकाई के संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में उच्च स्तरीय औद्योगिक रोजगार उपलब्ध होंगे। साथ ही, यहां विकसित होने वाली तकनीकी क्षमताएं प्रदेश को हाई-स्पीड रेल और मेट्रो निर्माण के वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाएंगी।