सीएम डॉ. मोहन यादव
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भोपाल में 17-18 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में खनन कॉन्क्लेव का आयोजन होगा, जिसमें देश-विदेश के 600 इंडस्ट्रियलिस्ट और शिक्षाविद हिस्सा लेंगे। इस कॉन्क्लेव में डिजिटलाइजेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग और खनन उद्योग में उनके योगदान पर चर्चा की जाएगी। खनन से जुड़े स्टार्टअप्स को आगामी तकनीकों की जानकारी और इनोवेशन के अवसरों पर भी चर्चा होगी।
मध्य प्रदेश खनिज संसाधनों में भी अग्रणी है। पन्ना जिले में देश का एकमात्र हीरे का भंडार स्थित है, जिससे प्रतिवर्ष एक लाख कैरेट हीरे का उत्पादन होता है। इसके अलावा, मझगांव हीरा खदान और बुंदर हीरा ब्लॉक में भी व्यापक भंडार हैं। मलाज़खण्ड में देश की सबसे बड़ी तांबा खदान है, जो भारत के कुल तांबा भंडार का 70% उत्पादन करती है। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश के पास देश का सबसे बड़ा निजी कोयला उत्पादक ब्लॉक, सासन कोयला खदान है। यह खदान अपने विशाल खनन उपकरणों के लिए प्रसिद्ध है और यहां से बड़ी मात्रा में कोयला निकाला जाता है। राज्य में चूना पत्थर और कोयले के भंडारों के कारण यह देश की सीमेंट उत्पादन क्षमता में 7% योगदान देता है।
मध्य प्रदेश में कोलबेड मिथेन (सीबीएम) का भी बड़ा भंडार है, जिससे यह राज्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग में भी अग्रणी है। सोहागपुर ईस्ट और वेस्ट सीवीएम ब्लॉक का संचालन रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा किया जाता है और इसके गैस परिवहन के लिए शहडोल से फूलपुर तक एक गैस पाइप लाइन का निर्माण किया जा रहा है।
खनिज कानून में सुधार और जिला खनिज निधि (डीएमएफ) की स्थापना से प्रदेश में खनिज नीलामी प्रक्रिया में भी सुधार हुआ है। अब तक 78 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है, जिससे प्रदेश को देश में प्रथम स्थान मिला है। मध्य प्रदेश का खनन उद्योग राज्य को ऊर्जा, औद्योगिक और आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।