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MP Monsoon Session: मेट्रोपॉलिटन विधेयक विस में पेश, विक्रम विश्वविद्यालय का नाम अब सम्राट विक्रमादित्य

Mon, 04 Aug 2025 09:48 PM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के छठे दिन कई अहम विधेयक पेश किए गए और एक पास भी हुआ। सबसे खास बात यह रही कि विक्रम विश्वविद्यालय का नाम बदलकर अब सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय करने का संशोधन विधेयक सदन में पारित कर दिया गया। 
 
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मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के छठे दिन मेट्रोपॉलिटन और अन्य संशोधन विधेयक पेश किए गए। सदन में उच्च शिक्षा विभाग का मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2025 चर्चा के बाद पास कर दिया गया। इसके साथ ही उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय का नाम अब सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय होगा।  मध्य प्रदेश विधानसभा में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास विधेयक 2025, कारखाना (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक 2025 और मंत्री प्रहलाद पटेल ने कारखाना (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक 2025 सदन में पेश किया। इस विधेयक पर मंगलवार को चर्चा हो सकती है। अध्यक्ष की अनुमति से उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने पटल पर मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक प्रस्तुत कर उस पर चर्चा शुरू की। इस विधेयक का सत्ता पक्ष और विपक्ष के करीब सभी सदस्यों ने सहमति जताई और अपने सुझाव के साथ मंत्री से सवाल किए। जिस पर मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि  प्रदेश के महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अंतर्गत भर्ती की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिथि विद्वानों (गेस्ट फैकल्टी) को बाहर नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हीं पदों को खाली रखा जाएगा, जहां उनकी सेवाएं चल रही हैं। शेष पदों पर नियमित भर्ती की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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मंत्री परमार ने कहा कि विश्वविद्यालयों में आरक्षण रोस्टर तैयार किया जा चुका है और विश्वविद्यालय को एक इकाई मानकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। राज्यपाल ने भी निर्देश दिए हैं कि भर्ती प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण की जाए। उन्होंने कहा कि जहां छात्र संख्या अधिक है, वहां बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती की जाएगी ताकि शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

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छात्र हितों के लिए डिजिलॉकर और क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम
मंत्री परमार ने जानकारी दी कि मध्य प्रदेश में डिजिलॉकर की सुविधा शुरू कर दी गई है, जिसके माध्यम से छात्रों के शैक्षणिक दस्तावेज डिजिटली संरक्षित होंगे। इससे छात्रों को विभिन्न प्रवेश व शैक्षणिक अवसरों में सुविधा मिलेगी। साथ ही क्रेडिट कार्ड सिस्टम को लागू किया जा रहा है, जिससे छात्र अपनी पढ़ाई दूसरे विश्वविद्यालय या राज्य में ट्रांसफर कर सकेंगे।

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शिक्षा गुणवत्ता और डिजिटलाइजेशन पर जोर
परमार ने बताया कि मध्य प्रदेश के 60 छात्र UPSC में चयनित हुए हैं, जो राज्य की शिक्षा व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह आयोजित किए जाएंगे और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
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भाषा को लेकर स्पष्ट नीति
भाषा विवाद पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों में हर भाषा को एक विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाएगा ताकि समन्वय बना रहे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी भाषाओं का समावेश होगा और “एमपी हृदय प्रदेश है, इसे भाषा से जोड़ा जाएगा। मंत्री परमार ने कहा कि राज्य के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 14 अगस्त से पहले प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी ताकि सत्र समय पर प्रारंभ हो सके।

मंत्री पटेल ने खोली नगर निगम के अधिकारियों की पोल 
प्रदेश में कम होते भूजल स्तर को लेकर चर्चा में मंत्री प्रहलाद पटेल ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अपने सरकारी आवास पर पौधारोपण के लिए ग्रे वाटर का कनेक्शन मांगा था, लेकिन उन्हें अधिकारियों ने पीने के पानी के तीन कनेक्शन देने का प्रस्ताव दे डाला। उन्होंने सदन में खुलासा करते हुए कहा कि मैंने उनसे कहा कि यह तो गलत है। इस पर निगम अधिकारियों ने कहा कि हम कनेक्शन दे देंगे, आप किसी को मत बताइए। लेकिन मैंने इस तरह की पेशकश ठुकरा दी।  उन्होंने बताया कि लगभग तीन महीने बाद जाकर उनके बंगले पर ग्रे वाटर का कनेक्शन मिला। प्रहलाद पटेल ने सुझाव देते हुए कहा कि सभी बड़े बंगलों और होटलों में ग्रे वॉटर की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए ताकि जल संरक्षण और पुनः उपयोग को बढ़ावा मिल सके।
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