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MP Monsoon Session: श्रम विधेयक पास, उद्योगों में हड़ताल से 45 दिन पहले देनी होगी सूचना, विपक्ष ने किया विरोध

Thu, 31 Jul 2025 08:00 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

विधानसभा में गुरुवार को श्रम विभाग के संशोधित नियमों को मंजूरी दे दी है। अब एमपी में उद्योगों में हड़ताल और तालाबंदी करने के लिए उद्योग प्रबंधन को डेढ़ महीने पहले सूचना देना आनिवार्य होगा। कांग्रेस विधायकों ने इसे मजदूरों का शोषण बढ़ाने वाला कहा है और विरोध किया।
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मध्य प्रदेश विधान सभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विधानसभा में गुरुवार को श्रम विभाग के संशोधित नियमों को मंजूरी दे दी है। अब एमपी में उद्योगों में हड़ताल और तालाबंदी करने के लिए उद्योग प्रबंधन को डेढ़ महीने पहले सूचना देना आनिवार्य होगा। कांग्रेस विधायकों ने इसे मजदूरों का शोषण बढ़ाने वाला कहा है और विरोध किया। इसके विरोध में सदन से वॉकआउट कर दिया और जमकर नारेबाजी की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस विधेयक से मजदूरों का हड़ताल और आंदोलन करने का अधिकार छीन जाएगा। यह ठेका प्रथा को बढ़ावा देने वाला है। जबकि श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि यह विधेयक मजदूरों के हित में है।
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लाइसेंस प्रक्रिया में राहत
इस विधेयक में ठेकेदारों के लिए कर्मचारियों को रखने के लिए लाइसेंस प्रक्रिया में भी राहत दी गई है। साथ ही कारखानों के लिए दिए जाने वाले लाइसेंस के लिए भी नियमों में संशोधन कर राहत देने का फैसला किया है। अलग-अलग संशोधनों को मंजूरी दिलाने के बाद सरकार ने कहा है कि इससे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर बनेंगे।


50 कर्मचारियों की लिमिट तय
विधेयक के माध्यम से ठेकेदारों को लाइसेंस लेने के लिए 50 कर्मचारियों की लिमिट तय कर दी गई है, जबकि पहले यह 20 कर्मचारियों को लेकर थी। इसी तरह कारखाने के लाइसेंस के लिए भी कर्मचारी संख्या की लिमिट बढ़कर 40 कर दी गई है।
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श्रम मंत्री द्वारा बताए गए विधेयक के प्रमुख बिंदु
 - 2019 में जो श्रम कानून बने हैं, संशोधित हुए हैं उसका अनुमोदन इस विधेयक के माध्यम से किया जाना है।
- अगर किसी उद्योग को बंद करना है तो एक महीने पहले समय पर सूचना देनी होगी। उसके बाद ही उद्योग बंद करने की कार्रवाई हो सकेगी।
- जिन्हें उद्योग के खिलाफ आंदोलन करना है उन्हें पहले सूचना देनी होगी।
- पीएफ का पैसा उनके खाते में ही जाएगा, उससे कोई खा नहीं पाएगा। यह मजदूर के हित में लाया गया विधेयक है। 
 

सरकार को ठेकेदारों की चिंता
कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने कहा कि सरकार को ठेकेदारों की चिंता है। श्रमिकों की चिंता नहीं है। इस विधेयक से यह बात साबित होती है कि भाजपा पूंजीवादियों की सरकार है और पूंजीवादियों के लिए काम करती है। कांग्रेस विधायक विजय रेव नाथ चौरे ने कहा कि ठेका प्रथा को बढ़ावा देने वाला यह विधेयक श्रमिकों का और अधिक शोषण कराएगा। जिसे ठेका मिलता है, वह सरकार से एक कर्मचारी के लिए 15 हजार रुपए लेता है और श्रमिक को 5 हजार रुपए देता है।

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कांग्रेस ने मना किया तो वोटिंग से कराया पास
कांग्रेस विधायक सोहनलाल वाल्मीकि ने इस विधेयक की प्रस्ताव पर संशोधन प्रस्ताव देते हुए कहा कि श्रमिकों का अधिकार है हड़ताल करना, आंदोलन करना और इस नियम के लागू होने के बाद श्रमिकों के अधिकार छीन जाएंगे। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि श्रम मंत्री ने कहा है इसमें उद्योग के मालिक के बीच जिम्मेदारी तय की गई है। लेकिन सोहनलाल वाल्मीकि ने संशोधन प्रस्ताव वापस लेने से मना कर दिया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर वोटिंग कराई और संशोधन प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया गया। इसके बाद विधेयक को पारित घोषित कर दिया गया। कांग्रेस के सदस्यों ने इस फैसले के खिलाफ सदन से वॉकआउट कर दिया और बाहर आकर नारेबाजी की।
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बिचौलिए खा जाते हैं पैसे
कांग्रेस विधायक दिनेश जैन बोस ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी का ठेका सिस्टम से भारी शोषण होता है। बीच में बिचौलिए पैसे खा जाते हैं। इसलिए सीधे आउटसोर्स कर्मचारी के खाते में पैसे डालने की व्यवस्था होनी चाहिए। कंप्यूटर ऑपरेटर को सरकार 18 हजार का भुगतान करती है, लेकिन उन्हें 12 हजार रुपए से 13 हजार रुपए मिलते हैं। बीच में बिचौलिए पैसे खा जाते हैंष इसलिए सीधे आउटसोर्स कर्मचारी के खाते में पैसे डालने की व्यवस्था होनी चाहिए।
 
 
 
 
 
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