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LS Polls: तीन आदिवासी सीट पर कड़ा मुकाबला, राहुल की सभाओं के बाद अब पीएम मोदी आएंगे; आखिरी दौर में उठापटक जारी

सार

LS Polls: चौथे चरण में मालवा निमाड़ की तीन आदिवासी सीट पर चुनाव होने है। ऐसे में
कांग्रेस और भाजपा के लिए ये तीनों सीट प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई हैं। सोमवार को राहुल गांधी ने झाबुआ और खरगोन क्षेत्र में सभाएं ली, जबकि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा करवाई जा रही है।
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तीन आदिवासी सीट पर कड़ा मुकाबला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मालवा निमाड़ की तीन आदिवासी सीट भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई हैं। इंदौर में कांग्रेस उम्मीदवार द्वारा नामांकन वापस लिए जाने के बाद भले ही भाजपा की राह आसान हो गई है, लेकिन मालवा निमाड़ की तीन आदिवासी सीट पर उसे कांग्रेस से कड़ी चुनौती मिल रही है। यही कारण है कि दिल्ली पहुंचे फीडबैक के बाद अब मंगलवार को धार और खरगोन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा करवाई जा रही है। पार्टी के कुछ और बड़े नेता भी अगले 10 दिन में इन संसदीय क्षेत्रों में पहुंचेंगे। सोमवार को राहुल गांधी ने झाबुआ और खरगोन क्षेत्र में सभाएं ली और जल्दी ही प्रियंका गांधी की सभा धार में होगी।

धार में मुकाबला 2014 में सांसद रही और एक बार फिर मैदान संभाल रही सावित्री ठाकुर और युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे तेजतर्रार नेता राधेश्याम मुवेल के बीच है। पिछला चुनाव यहां से भाजपा के छतरसिंह दरबार जीते थे। यहां की 8 में से 5 विधानसभा सीट कांग्रेस के कब्जे में है तो 3 पर भाजपा के विधायक हैं। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इसी संसदीय क्षेत्र से हैं। तीन बार चुनाव जीत चुके कुक्षी के विधायक हनी बघेल, सरदारपुर के विधायक प्रताप ग्रेवाल और जयस के संस्थापकों में से एक मनावर के कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा भी पूरी ताकत से लगे हुए हैं। यहां की 5 आदिवासी सीटों पर कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक रखी है तो भाजपा धार, बदनावर और महू में ज्यादा से ज्यादा लीड मिले इसके लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। यहां भाजपा अंतिम दौर में बढ़त बनाने के लिए प्रधानमंत्री की सभा करवा रही है। 7 मई को वे यहां सभा लेंगे। कांग्रेस यहां प्रियंका गांधी की सभा करवाइगी इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है। 

झाबुआ में कांग्रेस के टिकट पर कद्दावर नेता कांतिलाल भूरिया चुनाव लड़ रहे हैं, तो भाजपा ने वन मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी अनिता चौहान को मैदान में उतारा है। यहां का चुनाव दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। भूरिया का यह अंतिम चुनाव है। वे यहां से पांच लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं और तीन बार विधायक भी रहे हैं। उनके बेटे विक्रांत झाबुआ से विधायक हैं, जबकि जोबट से कांग्रेस की ही सेना पटेल। 6 मई को राहुल गांधी भूरिया के समर्थन में सभा लेने जोबट पहुंच रहे हैं। कांग्रेस का कमजोर पक्ष रतलाम शहर और रतलाम ग्रामीण सीट है। उसकी कोशिश यह है कि यहां उसे कम से कम मतों से पराजय मिले। झाबुआ, थांदला, जोबट में कांग्रेस जीत के अंतर को ज्यादा से ज्यादा रखने की कोशिश कर रही है, वहीं अलीराजपुर और पेटलावद में भाजपा बेहतर कर सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 महीने पहले झाबुआ आकर विशाल आदिवासी महाकुंभ को संबोधित कर चुके हैं। भाजपा तब से ही इस सीट पर पूरी ताकत से भिड़ी हुई है। प्रदेश मंत्रिमंडल के तीन सदस्य नागर सिंह चौहान, निर्मला भूरिया और चेतन काश्यप इसी संसदीय क्षेत्र से हैं। यह चुनाव उनके लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। 

खरगोन में सोमवार को राहुल गांधी ने सेगांव में एक बड़ी सभा को संबोधित किया। प्रधानमंत्री की सभा मंगलवार को खरगोन के मेला ग्राउंड पर होना है। यहां भी 8 में से 5 विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के पास हैं, जबकि 3 पर भाजपा काबिज है। भाजपा ने यहां से अपने वर्तमान सांसद गजेंद्र पटेल को ही टिकट दिया है, तो कांग्रेस ने सरकारी नौकरी छोड़कर आए पोरलाल खरते को उम्मीदवार बनाया है। ख्ररते जयस के संस्थापकों में से भी एक रहे हैं और उनकी आदिवासी युवाओं में अच्छी पकड़ है। यहां की 5 आदिवासी सीटों पर अपनी बढ़त बरकरार रखने के लिए कांग्रेस एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है तो भाजपा खरगोन, कसरावद और महेश्वर में ज्यादा से ज्यादा बढ़त के साथ ही आदिवासी सीटों पर कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने में लगी है। 

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नागर सिंह और विक्रांत के बिगड़े बोल
झाबुआ सीट को अपने पाले में करने के लिए भाजपा और कांग्रेस तो कोई कसर बाकी नहीं रख रही है, लेकिन यहां का चुनाव वन मंत्री नागर सिंह चौहान और कांग्रेस विधायक डॉ. विक्रांत भूरिया के बिगड़े बोल के कारण भी चर्चा में आ गया है। पिछले दिनों एक चुनावी सभा में वन मंत्री ने धमकाने वाले अंदाज में भूरिया को निशाने पर लिया था और कहा था कि ये विक्रांत भूरिया मेरे बारे में जो कुछ कह रहा है, उसका उन्हें भयंकर परिणाम भुगतना पड़ेगा।  उसका पाला नागर सिंह चौहान से पड़ा है। उसको पता नहीं है ये किस खेत की मूली है। जवाब में भूरिया ने कहा कि आखिर नागर सिंह के भीतर का डाकू जाग ही गया, जो बौखलाहट उनके चेहरे पर दिख रही है, वह हार की बौखलाहट है। मैं भी डॉक्टर हूं, सर्जन हूं अच्छे-अच्छों का इलाज कर चुका हूं, तो आप किस खेत की मूली हैं।  गौरतलब है कि चौहान की पत्नी और डॉ. भूरिया के पिता इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार हैं।

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