चीतो से जुड़ी जानकारी आरटीआई में देने से इंकार
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मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत के कारणों से जुड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने से वन विभाग ने इनकार कर दिया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में कूनो के डीएफओ कार्यालय ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(ए) का हवाला दिया। वहीं, चीता प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के विदेश दौरों की जानकारी मांगने पर कार्यालय ने कहा कि उसके पास इस संबंध में कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यह जवाब 9 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट रोकने के आधार के रूप में विभाग ने कहा कि जानकारी सार्वजनिक करने से देश की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा, सामरिक, वैज्ञानिक और आर्थिक हितों तथा विदेशी राज्यों के साथ संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट रोकने के आधार पर सवाल
पर्यावरण कार्यकर्ता अजय दुबे ने रिपोर्ट देने से इनकार किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चीतों की मौत के वैज्ञानिक कारणों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने से संरक्षण परियोजना का आकलन करने और जिम्मेदारी तय करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने सवाल किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट साझा करने से राष्ट्रीय सुरक्षा को किस तरह खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि आरटीआई कानून संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) से निकलता है, जो हर भारतीय नागरिक को जानने का अधिकार देता है। एमपी वन विभाग भारतीय नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों से ज्यादा विदेशी हितों को प्राथमिकता क्यों दे रहा है? चीता प्रोजेक्ट शुरू होने से अब तक कई चीतों की मौत हो चुकी है। मौत के वैज्ञानिक कारणों का खुलासा किए बिना जवाबदेही कैसे तय होगी?
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विदेश दौरों का रिकॉर्ड कहां है?
आरटीआई आवेदन में चीता प्रोजेक्ट से संबंधित अधिकारियों के विदेश दौरों का ब्योरा भी मांगा गया था। डीएफओ कार्यालय ने जवाब दिया कि उसके पास इस संबंध में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। दुबे ने नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका सहित संबंधित देशों के साथ हुए समझौता ज्ञापनों (MoU) की प्रतियां और अधिकारियों के दौरों पर हुए खर्च का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि कूनो नेशनल पार्क डीएफओ चीता प्रोजेक्ट को एक सार्वजनिक संरक्षण परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि एक गुप्त मिशन के रूप में चलाना चाहता है।