मध्यप्रदेश में चुनाव का मौसम है, ऐसे में व्यापम का मुद्दा कैसे अनछुआ रह सकता है। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर व्यापम को लेकर हमला क्या बोला यह मुद्दा फिर गर्मा गया। व्यापम में घोटाला हुए 10 साल से अधिक का समय हो गया, इसकी जांच अभी भी जारी है।
बता दें कि पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव और पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा जैसे तमाम रसूखदार लोगों के नाम इस घोटाले में शामिल रहे हैं। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी घोटाले को लेकर आरोप लगते आए हैं। इस मामले से जुड़े कई लोगों की मौत इस बीच हो चुकी है। आइए एक बार फिर हम इस घोटाले का राउंड अप लेते हैं।
क्या है घोटाला?
व्यापम का पूरा नाम व्यावसायिक परीक्षा मंडल है। इसके द्वारा ली जाने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थी के नाम पर किसी और व्यक्ति को बैठाकर परीक्षा दिलवाई जाती थी। परीक्षा दिलवाने और पास करवाने के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी। इसमें परीक्षा देने वाले का नाम, फोटो, पता जैसी तमाम जानकारियां फर्जी होती थीं।
राजनेता, अधिकारी और दलाल इसमें लिप्त पाए गए थे। व्यापम में यह खेल लंबे समय से चल रहा था। लेकिन साल 2013 में इंदौर पुलिस ने इस खेल को उजागर कर दिया। पुलिस की जांच में ये तथ्य सामने आए कि इस घोटाले के तार सिर्फ मध्यप्रदेश में ही नहीं फैले हैं। बल्कि छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, आंध्रप्रदेश जैसे कई राज्यों से जुड़े हैं। घोटाला सामने आने से शिवराज सरकार की देश भर में खासी किरकिरी हुई। इसके बाद इसका नाम बदलकर कर्मचारी चयन मंडल किया गया, ताकि नाम बदलकर घोटाले पर पर्दा डाला जा सके।
क्या है जांच का स्टेट्स
वर्तमान में केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई इस पूरे घोटाले की जांच कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद कोर्ट ने सीबीआई को यह केस सौंप दिया था। सीबीआई अपनी जांच के बाद इस घोटाले में अब तक 100 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी कर चुकी है। जबकि सीबीआई ने 1,242 लोगों को इसमें आरोपी बनाया है। जबकि इसके पहले जांच करने वाली स्टेट पुलिस ने 4,046 को आरोपी बनाया गया था, जिसमें से 956 आरोपियों का अब तक पता नहीं चला है। वहीं जांच अभी जारी है।
अब तक कितनी मौत
बताया जा रहा है कि इस पूरे घोटाले की जांच के दौरान अब तक 40 से अधिक ऐसे लोगों की मौत हो चुकी है, जो इस घोटाले से जुड़े रहे हैं। चाहे फिर फिर इस पर रिपोर्टिंग करने वाले नेशनल चैनल के पत्रकार हों, जांचकर्ता हों, गवाह हों, परीक्षा देने वाले छात्र हों या आरोपी। किसी न किसी तरह से इनकी मौत होती गई। हालांकि, राज्य सरकार हमेशा इस बात से इनकार करती आई है कि इन मौतों का संबंध इस घोटाले और इसकी जांच से है।