मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एमपी में केंद्रीय नेताओं के दौरे बढ़ते जा रहे हैं। राहुल के बाद अब प्रियंका गांधी एमपी आ रही हैं। प्रियंका गांधी गुरुवार को धार जिले के मोहनखेड़ा में आमसभा को संबोधित करेंगी। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी मौजूद रहेंगे। वे यहां अन्य कार्यक्रमों में भी शामिल होंगी।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत ने पत्रकार वार्ता में बताया कि प्रियंका गांधी पांच अक्टूबर को सुबह 9.15 बजे नई दिल्ली से विशेष वायुयान से प्रस्थान कर पूर्वान्ह 10.45 बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंचेंगी। गांधी पूर्वान्ह 11 बजे इंदौर से धार जिले के मोहनखेड़ा के लिए रवाना होंगी और पूर्वान्ह 11.30 बजे मोहनखेड़ा पहुंचेंगी। जहां वे पूर्वान्ह 11.40 बजे जैन तीर्थ स्थल का दर्शन एवं तीर्थ स्थल के ट्रस्टी प्रतिनिधियों द्वारा आयोजित स्वागत समारोह में शामिल होंगी।
गांधी उसी दिन मोहनखेड़ा में ही दोपहर 12.10 बजे आदिवासी जननायक क्रांतिकारी नेता, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद टंट्या मामा की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में शामिल होंगी। प्रियंका गांधी दोपहर 12.20 बजे मोहनखेड़ा में कांग्रेस की विशाल जनसभा को संबोधित करेंगी। वे दोपहर 13.45 बजे मोहनखेड़ा से इंदौर के लिए रवाना होगी और वहां से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी।
प्रियंका का तीसरा दौरा
विगत दिनों में मप्र में प्रियंका गांधी का जबलपुर और ग्वालियर के बाद यह तीसरा दौरा होगा। पहले दो दौरों में मिले अपार जनसमर्थन को देखते हुए भाजपा की शिवराज सरकार हलाकान है कि प्रियंका गांधी की सभाओं में लाखों की संख्या में जनता आ रही है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सुनने के लिए ‘एक कार और तीन बेकार’ के नारे के बावजूद लाखों कुर्सियां खाली पड़ी हैं। शिवराज सिंह चौहान को अपने केद्रीय नेतृत्व को जबाव देते नहीं बन रहा है। कतिपय यही कारण है कि नरेन्द्र मोदी ने अब तक उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट नहीं दिया है।
कल होगा खुलासा
राजपूत ने कहा कि जहां एक ओर अभा कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, अभा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित मप्र के समस्त वरिष्ठ नेता मप्र के सर्वांगीण विकास की अवधारणा को लेकर जनता के बीच में मौजूद हैं। वहीं, दूसरी ओर भाजपा मोदी और शिवराज सिंह चौहान जनता के सामने झूठ, छल, प्रपंच और खोखले वादे परोस रहे हैं, जिनका खुलासा कल आयोजित कांग्रेस की जनसभा में होगा।
एमपी में आदिवासी वोटर्स निर्णायक भूमिका में
मध्यप्रदेश में आदिवासी वोटर्स काफी निर्णायक भूमिका में है और बिना उनके सत्ता पर काबिज होना मुश्किल है। सूबे में कुल 230 सीटों में से 47 सीटें आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित हैं, लेकिन उनका प्रभाव 80 से ज्यादा सीटों पर है। साल 2018 के चुनाव में आदिवासी वोटरों के छींटकने के चलते ही भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ गई थी। पिछले चुनाव में 47 में से 30 सीटें कांग्रेस ने जीती और 16 सीटें बीजेपी के खाते में गईं, जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। आदिवासी समुदाय एमपी में मालवा-निमाड़ में सबसे अहम माने जाते हैं। आदिवासी समुदाय के लिए सुरक्षित 47 सीटों में से मालवा-निमाड़ में 22 सीटें है।
बीजेपी के लिए मालवा-निमाड़ काफी अहम
मालवा-निमाड़ एक दौर में बीजेपी गढ़ माना जाता था, लेकिन 2018 के चुनाव में पार्टी इस जीत को नहीं दोहरा सकी। इंदौर संभाग के आठ जिलों की 37 सीटों में से बीजेपी को महज 11 सीटें ही मिलीं। उज्जैन संभाग की 29 सीटों में बीजेपी को 17 सीटों पर ही सिमटना पड़ा था, इस कारण भाजपा इस क्षेत्र में खासा जोर लगा रही है तो वहीं कांग्रेस पूरी ताकत लगा रखा है। बीजेपी के लिए मालवा-निमाड़ कितना महत्वपूर्ण है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां की एक सीट से पार्टी ने महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को मैदान में उतारा है तो कांग्रेस इस इलाके को फतह करने के लिए अपने दिग्गज नेताओं को उतार दिया है। राहुल गांधी के बाद प्रियंका गांधी के उतरने का सियासी फायदा कांग्रेस को क्या मिलता है यह तो चुनाव नतीजे के बाद ही पता चल सकेगा?