मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचार का रथ थम गया है। अब 17 नवंबर को मतदान होगा। कांग्रेस जिन मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंचीं, उनमें जातिगत जनगणना, भ्रष्टाचार और 11 गारंटी मुख्य रहे। इसके साथ ही कुछ इलाकों में क्षेत्रीय मुद्दों को भी कांग्रेस ने भुनाने का प्रयास किया। जहां प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने मोर्चा संभाला, उन्होंने रोड शो, जनसभा के माध्यम से भाजपा सरकार को जमकर घेरने की कोशिश की। तो वहीं पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने प्रेसवार्ता के जरिए भी पार्टी मुख्यालय से इन मुद्दों को उठाया।
भ्रष्टाचार के मुद्दे को कांग्रेस ने चुनाव में शुरू से ही पकड़े रखा। चाहे वो 50 परसेंट कमिशन को लेकर वायरल होने वाला पत्र हो, या केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बेटे के वायरल वीडियो। इनके आधार पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर करप्शन के सीधे आरोप लगाए। इसके साथ ही कांग्रेस ने घोटालों और घपलों को लेकर भी भाजपा सरकार पर हमला बोला। इनमें पटवारी भर्ती परीक्षा, सिंहस्थ और व्यापम जैसे घोटालों का जिक्र किया गया।
जातिगत जनगणना
चुनाव में जातिगत जनगणना का मुद्दा कांग्रेस के लिए सबसे अहम मुद्दा था। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित सभी बड़े नेताओं ने अपनी सभाओं में सरकार आने पर जातिगत जनगणना करवाए जाने की बात कही। इतना ही नहीं कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में भी इसे शामिल किया है। इस मुद्दे के जरिए कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग को साधने की कोशिश की है।
11 गारंटी
कांग्रेस ने अपनी 11 गारंटियों को चुनाव में प्रमुखता से प्रचारित किया। इनमें महिलाओं को 1500 रुपये महीने, 500 रुपये में गैस सिलेंडर, 100 यूनिट बिजली का बिल माफ, 200 यूनिट का बिल हाफ, किसानों का कर्ज होगा माफ, पुरानी पेंशन योजना लागू होगी, पांच हॉर्स पावर सिंचाई की बिजली फ़्री, किसानों के बिजली बिल माफ, ओबीसी को 27% आरक्षण, 12 घंटे सिंचाई के लिए बिजली, जातिगत जनगणना करायेंगे और किसानों के मुकदमे वापस होंगे, इन गारंटियों को शामिल किया गया।
क्षेत्रीय मुद्दे
सीधी में हुए पेशाब कांड जैसे क्षेत्रीय मुद्दे भी कई एरिया में कांग्रेस की ओर से उठाए गए। विंध्य में सीधी का पेशाब कांड खासा प्रचारित किया गया। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को भी उठाया गया। कहीं-कहीं पर किसानों से जुड़े मुद्दे भी हावी रहे।