भोपाल में हबीबगंज पुलिस ने एक बुजुर्ग व्यक्ति की रिपोर्ट पर साइबर जालसाजों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोपियों ने इंश्योरेंस पॉलिसी मेच्योर होने पर उसके भुगतान के बदले करीब 35 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए थे। ठगी का एहसास होने पर फरियादी ने मामले की शिकायत पुलिस से की, जिसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। जालसाजों के मोबाइल नंबर के आधार पर उनकी तलाश की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, अतुल कुमार (69) अरेरा कालोनी में रहते हैं। अर्धशासकीय विभाग से रिटायर होने के बाद वह शेयर मार्केट में ट्रेडिंग का काम करते हैं। करीब तीन महीने पहले उनकी एक इंश्योरेंस पॉलिसी मेच्योर हुई थी, जिसका उन्हें करीब 45 लाख रुपये मिलना था। इस दौरान उनके पास अज्ञात व्यक्ति ने फोन किया और पॉलिसी मेच्योर होने की जानकारी देते हुए भुगतान का प्रोसेस शुरू करने के लिए 55 सौ रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करने का बोला। उसकी बातों में आकर अतुल कुमार ने उसे बताए गए यूपीआई नंबर पर पेमेंट कर दिया। उसके बाद जीएसटी चार्ज, बैंक चार्ज, एनओसी समेत विभिन्न प्रकार की प्रोसेसिंग फीस के नाम पर करीब 35 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लिए गए।
अतुल ने अपने दो-तीन बैंक एकाउंट से जालसाजों के आधा दर्जन मोबाइल नंबरों पर उक्त राशि अलग-अलग समय और दिनांक में ट्रांसफर की थी। बाद में उन्हें पता चला कि यह रुपये इंश्योरेंस वाले नहीं, बल्कि साइबर जालसाजों के पास जा रहे हैं, तो उन्होंने इसकी शिकायत हबीबगंज पुलिस से की। पुलिस ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। फरियादी द्वारा बताए गए मोबाइल नंबरों की डिटेल और खातों धारको की जानकारी जुटाई जा रही है।
एक्सीडेंट का आरोप लगाकर कार सवार इंजीनियर से अड़ीबाजी
राजधानी भोपाल में एक्सीडेंट का आरोप लगाकर लूटपाट और अड़ीबाजी करने के गिरोह सक्रिय हैं। आए दिन इस तरह की वारदातें राजधानी के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में होती रहती हैं, लेकिन सामान्य व्यक्ति पुलिस के चक्कर से बचने के लिए शिकायत नहीं करता, जिन मामलों में पुलिस के पास शिकायत की जाती है, उनमें कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। फरियादी को कभी बैरंग लौटा दिया जाता है, कभी गुमने की शिकायल लेकर चलता कर दिया जाता है।
ताजा मामला मंगलवार देर शाम का है, जहां एक मैटेरियल टेस्टिंग लैब के संचालक को एक्सीडेंट का आरोप लगाकर दो बदमाशों ने कार रुकवाई और बातों में उलझाकर कार से मोबाइल छीनकर फरार हो गए। बागसेवनिया पुलिस ने इस मामले में अड़ीबाजी का प्रकरण दर्ज करने की बजाय सिर्फ मोबाइल गुमने की शिकायत लेकर फरियादी को थाने से चलता कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, हर्षल पुराणिक पुत्र मनोज पुराणिक पी-2, 41, गोल्डन सिटी बागसेवनिया में परिवार के साथ रहते हैं और सिविल इंजीनियर हैं। हर्षल गुलमोहर कॉलोनी में मैटेरियल टेस्टिंग लैब है। उनके पिता लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर पद से सेवानिवृत्त हैं। हर्षल ने बताया कि कल शाम को सात बजे के बाद वे लैब से घर जाने के लिए कार से निकले थे। साढ़े सात बजे के करीब वे होशंगाबाद रोड से जाटखेड़ी की तरफ जाने वाली सड़क की तरफ मुड़ ही रहे थे कि ट्रैफिक अधिक होने के कारण रुक गए। इस दौरान 35-40 साल का एक व्यक्ति लंगड़ाते हुए आया और ड्राइवर की बगल वाले गेट का कांच पीटने लगा। मैंने कांच खोला तो आरोप लगाने लगा की आपने टक्कर मार दी है, एक्सीडेंट कर दिया है।
इसी बीच एक अन्य युवक ड्राइवर साइट का कांच पीटने लगा। मैं जब ड्राइविंग साइड का कांच खोला तो वह ट्रैफिक जाम करने का आरोप लगाते हुए तुरंत कार आगे बढ़ाने के लिए धमकाने लगा। मैं उससे बात ही कर रहा था, इसी बीच जिस बदमाश ने एक्सीडेंट का आरोप लगाया था, उसने कार की सीट पर रखा मोबाइल लेकर ओझल हो गया। मैं कार को थोड़ा आगे लगाकर दौड़ते हुए मौके पर पहुंचा तब तक दोनों रफूचक्कर हो चुके थे।
एफआईआर की बजाय गुमने की शिकायत ली
हर्षल पुराणिक ने बताया कि घटना के बाद बागसेवनिया थाने पहुंचे और पूरी घटना बताई। लिखित में शिकायत भी की, लेकिन काई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। मोबाइल में लगी हुई सिमें बंद कराने और उसी नंबर की दूसरी सिम लेने के लिए पुलिस ने मोबाइल गुमने की शिकायत लेकर चलता कर दिया है।
शहर भर में सक्रिय हैं इस तरह का गिरोह
पुलिस सूत्रों की मानें तो कभी एक्सीडेंट तो कभी गाड़ी को कट मारकर लोगों को गिराने तो कभी किसी लड़की या महिला से छेड़छाड़ कर भागने का आरोप लगाकर लूटपाट और अड़ीबाजी का गिरोह भोपाल में सक्रिय हैं। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में इस तरह की कई वारदातें हो चुकी हैं, लेकिन मामले सामने नहीं आ पाते। कुछ मामलों में पुलिस समझौता करा देती है, कुछ में फरियादी को पुलिस और कानूनी पचड़ों से बचने की समझाईश देकर चलता कर देती है। पुलिस की ठोस कार्रवाई नहीं होने से अड़ीबाजी करने वाले गिरोह की सक्रियता बढ़ती जा रही है, जो शहरवासियों के लिए चिंता का सबब है।
पिता ने पैसे देने से मना किया तो बीकॉम छात्र ने जहर खाकर दी जान
भोपाल के कोलार इलाके में रहने वाले बीकॉम छात्र की जहरीला पदार्थ खाने से मौत हो गई। उसके पास कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि छात्र अपने पिता से पैसे मांग रहा था, लेकिन उन्होंने देने से मना कर दिया था। फिलहाल मर्ग कायम कर शव का पीएम कराने के बाद लाश परिजन को सौंप दी गई है। जांच के बाद जहर खाने के सही कारणों का खुलासा हो पाएगा।
पुलिस के मुताबिक, सतेंद्र मारण पुत्र जसभान सिंह मारण (20) नयापुरा कोलार रोड पर रहता था और बीकॉम अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। उसके पिता पुस्तैनी खेती के साथ प्रायवेट काम भी करते हैं। मंगलवार रात को अचानक सतेंद्र उल्टियां करने लगा तो परिजन उसे इलाज के लिए चूनाभट्टी स्थित निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां कुछ देर बाद ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल से मिली सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पीएम कराने के बाद लाश परिजन को सौंप दी है।
प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि सतेंद्र ने अपने पिता से खर्च के लिए पैसे मांगे थे। इस पर पिता ने बोला कि कुछ समय पहले ही पैसे दिए थे। यह कहते हुए उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया था। उसके बाद सतेंद्र अपने कमरे में चला गया। कुछ देर बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ गई तो परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे। हालांकि पुलिस का कहना है कि जहर खाने के सही कारणों का खुलासा जांच के बाद ही हो पाएगा।