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MP Budget 2026-27: बढ़ते कर्ज से फूल रहा राज्य की अर्थव्यवस्था का दम, तीन साल का रोलिंग बजट पेश करेगी सरकार

Mon, 16 Feb 2026 06:00 AM IST
आनंद पवार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

Madhya Pradesh Budget 2026-27: मध्य प्रदेश सरकार 18 फरवरी को 2026-27 का बजट पेश करेगी, जिसमें करीब 4.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान होने की संभावना है। लेकिन राज्य पर बढ़ता कर्ज और घटती केंद्रीय हिस्सेदारी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
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लगातार बढ़ता कर्ज चुनौती बनता जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को अंतिम रूप देने में जुटी है। 18 फरवरी को वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा विधानसभा में अगले तीन वर्षों का रोलिंग बजट पेश करेंगे। इस बार राज्य का बजट आकार करीब 4.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के मुकाबले 15 फीसदी ज्यादा रहने की संभावना है। लेकिन, चिंताजनक बात यह है कि राज्य पर बजट से ज्यादा कर्ज हो गया है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था का दम फूल रहा है। मोहन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती लगातार बढ़ता कर्ज है। मार्च 2026 तक राज्य पर कुल ऋण करीब 5.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो गंभीर वित्तीय दबाव का संकेत देता है। सरकार 18 फरवरी को विधानसभा में बजट पेश करेगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य का बजट लगभग 4.21 लाख करोड़ रुपये था। ऐसे में 2026-27 में प्रस्तावित 4.85 लाख करोड़ रुपये का बजट उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।
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केंद्रीय करों में हिस्सेदारी घटने का असर
केंद्रीय करों में प्रदेश की हिस्सेदारी घटने से भी प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है। वित्त विभाग के अनुसार, यह हिस्सेदारी 7.850 प्रतिशत से घटकर 7.347 प्रतिशत रह गई है। करीब आधा प्रतिशत की इस कमी से राज्य को लगभग 8,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में प्रदेश को हर साल करीब 7,500 करोड़ रुपये कम प्राप्त हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कमी की भरपाई के लिए राज्य को अपने संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और व्यय प्राथमिकताओं में संतुलन बनाना होगा।
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बीते पांच साल ऐसे रहे प्रदेश के बजट - फोटो : अमर उजाला
सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं का बढ़ता व्यय
पिछले तीन वर्षों में कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च में तेजी आई है। लाडली बहना योजना के तहत पात्र महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता दी जा रही है। शुरुआत में 1,250 रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे, जिसे बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है। इस योजना पर सालाना लगभग 19 से 22 हजार करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। इसी तरह किसान सम्मान निधि के अंतर्गत लगभग 87 लाख किसानों को सहायता दी जाती है, जिस पर करीब 5 हजार करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय होता है। स्कूटर और लैपटॉप जैसी प्रोत्साहन योजनाएं भी वित्तीय भार बढ़ा रही हैं। इसके अलावा, कुल बजट का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा वेतन, भत्तों और पेंशन पर खर्च किया जा रहा है, जिससे राजकोष पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। 

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तीन साल के अग्रिम अनुमान होंगे
इस बार सरकार बजट प्रक्रिया में ‘रोलिंग बजट’ प्रणाली लागू करने जा रही है। इसके तहत 2026-27 के साथ-साथ 2027-28 और 2028-29 के लिए भी अग्रिम अनुमान और वित्तीय रूपरेखा प्रस्तुत की जाएगी। हर वर्ष इन प्रावधानों की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से योजनाओं को दीर्घकालिक दृष्टि के साथ लागू करने में मदद मिलेगी और नीतियां अधिक परिणामोन्मुख बन सकेंगी।
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