मध्य प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने आज जो बजट पेश किया है, उसमें सिर्फ बातों के बताशे बनाए गए हैं और जनहित का मुद्दा पूरी तरह सफाचट है। हद तो इस बात की है कि चुनाव के बाद दूसरा बजट पेश कर दिया गया, लेकिन चुनाव में किए गए वादे अब तक नहीं निभाए गए। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए यह बात कही। कमलनाथ ने कहा कि वर्तमान सरकार का बजट पूरी तरह से निराश करने वाला है। इससे मध्य प्रदेश के नवनिर्माण का कोई रास्ता नजर नहीं आता।
कमलनाथ ने कहा कि मध्य प्रदेश की बहनें इस बात की प्रतीक्षा कर रही थीं कि बजट में उन्हें तीन हजार प्रति महीने लाडली बहना योजना में दिए जाने की घोषणा की जाएगी, लेकिन सरकार ने अपने चुनावी वादों के बारे में एक शब्द नहीं बोला। दूसरी तरफ जब से वर्तमान सरकार बनी है, तब से लाडली बहना योजना में महिलाओं की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ऐसा नहीं है कि मध्य प्रदेश सरकार सिर्फ लाडली बहना योजना में हितग्राहियों की संख्या कम कर रही है, बल्कि कन्या विवाह योजना में भी 2023-24 की तुलना में 2024-25 में 77 प्रतिशत हितग्राही कम हो गए हैं। 2023-24 में जहां 59445 बेटियों को कन्या विवाह योजना में लाभार्थी बनाया गया था, वहीं 2024-25 में यह संख्या घटकर 13490 रह गई है।
ये भी पढ़ें:
ड्रोन प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए नई नीति की तैयारी, औद्योगीकरण पर विशेष ध्यान; जानें
खाद, बीज, बिजली और पानी के संकट पर कोई फैसला नहीं
इसी तरह किसान भाइयों को उम्मीद थी कि बजट में गेहूं और धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र के अनुसार 27 सौ प्रति क्विंटल और 31 सौ रुपये प्रति कुंतल करने की घोषणा की जाएगी, लेकिन इस बारे में भी वित्त मंत्री ने एक शब्द नहीं बोला। मध्य प्रदेश का किसान निरंतर खाद, बीज, बिजली और पानी के संकट से जूझता है, लेकिन इस दिशा में बजट में कोई कदम नहीं उठाया गया।
रोजगार सृजन पर नहीं हुआ काम
कमलनाथ ने कहा कि पिछले बजट में वित्त मंत्री ने प्रदेश में रोजगार सृजन का वादा किया था, लेकिन इस बजट में ऐसा कोई आंकड़ा पेश नहीं किया कि पिछले एक साल में प्रदेश में कितनी सरकारी नौकरी, कितनी निजी नौकरी और कितना रोजगार सृजित किया गया। कल सरकार द्वारा पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में ही यह बात स्वीकार की गई है कि निजी क्षेत्र में 15 हजार नौकरियां कम हो गई हैं।
ये भी पढ़ें:
लाडली बहनों को मिलेगा अटल पेंशन योजना का लाभ, बैगा-भारिया महिलाओं को पोषण मदद; जानें क्या खास
मेडिकल कॉलेज की प्रगति पर नहीं किया गया विचार
वित्त मंत्री ने 11 नए आयुर्वेदिक कॉलेज खोलने की घोषणा की है, लेकिन यह नहीं बताया कि पिछले साल जिन मेडिकल कॉलेज को खोलने की घोषणा की गई थी, उनके विषय में अब तक क्या प्रगति हुई है। प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति यह है कि पीएम श्री कॉलेज और सीएम राइज स्कूल आज तक कांग्रेस सरकारों के जमाने में बनाए गए स्कूल और कॉलेज की इमारत में चल रहे हैं। वहां योग्य शैक्षणिक स्टाफ की नियुक्ति तक नहीं की गई है।
टैक्स घटाने की बजाय बढ़ा दिया
कमलनाथ ने कहा कि वित्त मंत्री इस बात का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं कि सरकार ने कोई नया टैक्स जनता पर नहीं लगाया है। सच्चाई यह है कि टैक्स लगाने का ज्यादातर मामला जीएसटी के अधीन जीएसटी काउंसिल के पास है और राज्य सरकार का उसमें कोई विशेष हस्तक्षेप नहीं है। इसी तरह प्रदेश में पहले ही पेट्रोल और डीजल पर अत्यधिक वैट लगता है, ऐसे में वहां टैक्स बढ़ाने की जगह घटाने के बारे में सोचा जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें:
विधानसभा की दर्शक दीर्घा में नजर आए शिवराज सिंह चौहान, सीएम मोहन यादव ने किया स्वागत
कर्ज को कम करने की दिशा नहीं सोच रही सरकार
बजट से स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को कम करने की दिशा में सरकार की कोई सोच नहीं है। हालत यह है कि मध्य प्रदेश सरकार के बजट का जितना आकार है, तकरीबन उतना ही कर्ज प्रदेश सरकार के ऊपर चढ़ चुका है। प्रदेश के ऊपर 4 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज है। पिछली भाजपा सरकार की तरह वर्तमान सरकार भी कर्ज लेकर घी पीने की रणनीति पर काम कर रही है। कर्ज की यह रकम मध्यप्रदेश के किसान, नौजवान और महिलाओं के विकास पर नहीं बल्कि सरकारी तमाशेबाजी पर खर्च की जानी है।
जातियों के बुनियादी विकास पर नहीं हुआ कार्य
सबसे बड़े दुर्भाग्य की बात यह है कि बजट में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और सर्व समाज के लिए किसी बुनियादी विकास की घोषणा नहीं की गई है।
सीएम ने कहा- बजट में विकसित मध्यप्रदेश 2047 का विजन
वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बजट की सराहना की। उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, 'हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने के लिए हमारी सरकार ने भी विकसित मध्यप्रदेश 2047 का विजन रखा है, प्रदेश का यह बजट उस संकल्प को प्राप्त करने की ओर अग्रसर है।
पूर्व कृषि मंत्री ने बजट पर मांगा श्वेत पत्र
बजट 2025 पर पूर्व कृषि मंत्री एवं विधायक सचिन यादव ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आज का बजट बिल्कुल नीरस था। इतना नीरस था कि जब सदन में वित्त मंत्री बजट पेश कर रहे थे तब मंत्री सो रहे थे। सरकार को बजट को लेकर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। कर्ज़ का ब्याज चुकाने के लिए भी कर्ज़ लेना पड़ रहा है। वित्तीय स्थितियां पूरी तरह से चरमरा गई हैं।