सीएम शिवराज ने लाडली बहना योजना के शुभारंभ पर महिलाओं पर पुष्पवर्षा की
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मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव इसी साल नवंबर-दिसंबर में प्रस्तावित है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों के एजेंडे में महिलाओं के अधिक से अधिक वोट हासिल करना प्रमुखता से है। इन वोट्स पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लाड़ली बहना योजना के जरिये मजबूत दावा पेश किया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ इसका महत्व समझते हैं। इस वजह से उन्होंने इसी योजना को विस्तार देने का एलान किया है।
महिला वोटर क्यों है महत्वपूर्ण
मध्यप्रदेश में 41 जिलों में महिला वोटरों की संख्या अब पुरुष वोटरों से अधिक हो गई है। कुल वोटरों में महिलाओं का अनुपात भी बढ़ा है। 2018 में मध्यप्रदेश में एक हजार पुरुष वोटर्स पर 898 महिला वोटर थीं। 2023 में आंकड़ा बढ़कर 931 हो गया है। इस समय प्रदेश में 2.79 करोड़ पुरुष वोटर और 2.60 करोड़ महिला वोटर है। शिवराज सरकार को भरोसा है कि इन 2.6 करोड़ महिला वोटरों में से करीब 60 लाख महिलाएं लाड़ली बहना योजना की हितग्राही होंगी। इस वजह से शिवराज की इस योजना को उनका मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा है।
वोटिंग में हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ी
एक और कारण है, प्रदेश में हर विधानसभा चुनाव में महिलाओं के वोट बढ़ रहे हैं। 2008 के विधानसभा चुनावों में पुरुष और महिला वोटिंग में सात प्रतिशत का अंतर था। वहीं, 2013 में यह घटकर चार और 2018 में दो प्रतिशत रह गया। यानी लोकतंत्र के उत्सव में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों से कम नहीं, बल्कि बराबर हो रही है। ऐसे में उनके लिए किसी भी योजना की घोषणा पार्टी के पक्ष में ही होगी।
51 सीटों पर महिलाओं ने तय की हार-जीत
राजनीतिक दलों के महिलाओं पर बढ़ते फोकस का एक और बड़ा कारण यह भी है कि 2018 में 51 सीटों महिलाओं ने वोटिंग में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया था। इनमें से करीब 80 प्रतिशत सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी। करीब दो दर्जन सीटों पर महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 80 प्रतिशत से भी अधिक था। यह बताता है कि महिलाओं का बढ़ा प्रतिशत भाजपा को फायदा पहुंचा सकता है। 2018 के चुनावों की बात करें तो 230 सीटों के सदन में भाजपा ने 109 और कांग्रेस ने 114 सीटों पर जीत हासिल की थी। किसी तो भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। खास बात यह थी कि भाजपा (41.02%) को कांग्रेस (40.89%) से अधिक वोट मिले थे। इसके बाद भी पांच सीटें कम पड़ गई थी।
कमलनाथ ने चला दांव
पिछले चुनावों में भाजपा ने 10% टिकट महिला उम्मीदवारों को दिए थे, जबकि कांग्रेस ने 12% टिकट। यानी टिकट वितरण में कांग्रेस ने भाजपा से ज्यादा महिलाओं पर भरोसा जताया था। इस बार भी कांग्रेस ज्यादा महिलाओं को उम्मीदवार बनाकर आधी आबादी का भरोसा जीतने की कोशिश कर सकती है। दूसरी ओर, कमलनाथ ने लाड़ली बहना योजना का विरोध करने के बजाय यह कहकर विरोधी खेमे में हलचल बढ़ा दी कि जीतकर आए तो पात्र महिलाओं को 12 के बजाय 18 हजार रुपये सालाना देंगे। यानी हर महीने 1,500 रुपये। यह एक बड़ा दांव साबित हो सकता है।