केरवा डैम और उसके आसपास के क्षेत्र में अतिक्रमण का मामला सामने आया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के पालन में गठित समिति ने मौके पर निरीक्षण किया। इस दौरान 19 स्थानों पर अतिक्रमण और निर्माण से जुड़ी गतिविधियां दर्ज की गईं। निरीक्षण रिपोर्ट में ग्रीन बेल्ट और बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों, पक्के निर्माण, रिटेनिंग वॉल और कृत्रिम तालाबों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के पिकनिक रेस्टोरेंट और जल संसाधन विभाग के केरवा रेस्ट हाउस से जुड़े निर्माण भी दर्ज किए गए। रिपोर्ट में आरोप है कि रेस्टोरेंट ग्रीन बेल्ट में और रेस्ट हाउस बॉटनिकल गार्डन की जमीन पर स्थित है। रेस्ट हाउस के पास फुल टैंक लेवल (एफटीएल) क्षेत्र में सीमेंट-कंक्रीट के नए खंभे भी पाए गए। समिति ने कुछ स्थानों पर बांध की सीमा बताने वाले पत्थर या खंभे गायब होने का भी उल्लेख किया है।
एनजीटी के पुराने आदेश के बावजूद भराव नहीं हटने का दावा
निरीक्षण रिपोर्ट में महुआखेड़ा गांव के कुछ खसरा नंबरों पर किए गए भराव को नहीं हटाए जाने का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, एनजीटी के 4 फरवरी 2026 के आदेश के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। समिति ने इसे वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 और जल अधिनियम के उल्लंघन से जुड़ा मामला बताया है। कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद निरीक्षण के दौरान याचिकाकर्ता राशिद नूर खान, पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी. पांडेय, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वेटलैंड अथॉरिटी, नगर निगम, जल संसाधन विभाग और वन विभाग के प्रतिनिधि मौजूद रहे। संबंधित हलकों के पटवारियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, मौके पर उपस्थित लोगों की उपस्थिति का पंचनामा तैयार किया गया।
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एफटीएल क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल और पक्के निर्माण
निरीक्षण रिपोर्ट में मेंडोरा गांव में कई स्थानों पर जलाशय के एफटीएल क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल बनाए जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर बॉटनिकल गार्डन की जमीन पर पक्के कमरे बनाए गए हैं। एक मामले में करीब 0.93 हेक्टेयर जमीन पर भराव कर निर्माण कार्य किए जाने की बात भी दर्ज है। रिपोर्ट में बर्खेड़ी बाज्याफ्त गांव में पीजेपी एस्टेट से जुड़े निर्माण का उल्लेख है। इसमें बॉटनिकल गार्डन के लिए आरक्षित जमीन पर रिटेनिंग वॉल और आरसीसी सड़कें बनाए जाने की बात कही गई है।
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ग्रीन बेल्ट में कृत्रिम तालाब, बफर क्षेत्र में बंगला
समिति की रिपोर्ट में मेंडोरा गांव में कृत्रिम तालाब बनाए जाने का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, दो स्थानों पर ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में तालाब बनाए गए हैं। कुछ अन्य स्थानों पर एफटीएल क्षेत्र में रिटेनिंग वॉल का निर्माण दर्ज किया गया। मुल्ला जी की टेकरी क्षेत्र में एक बंगले के संबंध में रिपोर्ट में तीन स्तरों वाली रिटेनिंग वॉल और बफर क्षेत्र/ग्रीन बेल्ट में निर्माण का उल्लेख है। वहीं, कुशलपुरा गांव में एक मामले में एफटीएल क्षेत्र के भीतर सीमाएं बनाने, पानी के बहाव में बाधा डालने और जलाशय के एक हिस्से को निजी तालाब में बदलने का आरोप दर्ज किया गया है।
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नदी पर बिना अनुमति स्टॉप डैम बनाने का उल्लेख
रिपोर्ट में केरवा नदी पर एक बड़े सीमेंट-कंक्रीट का पुल और उसके बाद बांधनुमा संरचना बनाए जाने का भी उल्लेख है। निरीक्षण दल के अनुसार, इसके लिए अनुमति और वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इससे नदी के प्राकृतिक बहाव में बाधा आ सकती है और बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है। रिपोर्ट में केरवा नदी को जलाशय में पानी पहुंचाने वाले संभावित स्रोतों में से एक बताया गया है।