मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने नवजात शिशुओं की खरीदी-बिक्री करने वाले राजफाश किया है। दो नवजात बच्चों के अवैध कारोबार के बरसों पुराने मामलों का खुलासा करते हुए एसटीएफ ने सात लोगों को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया है। इनमें एक दाई और दो दंपती शामिल हैं।
चाइल्ड लाइन से मिले थे सुराग
एसटीएफ की इंदौर इकाई के पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री ने सोमवार को बताया कि बच्चों के हितों में काम करने वाली गैर सरकारी संस्था "चाइल्ड लाइन" से मिले सुरागों के आधार पर जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है।
उन्होंने बताया कि मामले में इंदौर निवासी दाई लीलाबाई और नजदीकी शहर देवास में रहने वाले उसके दो सहयोगियों-पुष्पा और प्रभुदयाल को गिरफ्तार किया है। इनके साथ ही देवास तथा रतलाम से एक-एक दंपती को भी गिरफ्तार किया गया है।
नौ व 13 साल के दो बच्चों को मुक्त कराया
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इन दंपतियों के साथ रह रहे नौ और 13 साल के दो बच्चों को फिलहाल एक बाल आश्रय गृह में रखा गया है। एसपी खत्री ने बताया कि हम दोनों दंपतियों और इन लड़कों का डीएनए टेस्ट कराने जा रहे हैं ताकि वैज्ञानिक रूप से तस्दीक हो सके कि वे इनके माता-पिता हैं या नहीं।
एक प्रसूतिगृह के जरिए हो रहा था अवैध कारोबार
जांच में पता है कि नवजात बच्चों के अवैध कारोबार को इंदौर में निजी क्षेत्र के एक प्रसूतिगृह के जरिये अंजाम दिया गया था। इसके संचालकों की कुछ साल पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी, जिसके बाद यह प्रसूतिगृह बंद हो गया था।
पैसों के लेन-देन की आशंका
पुलिस अधीक्षक ने कहा, "हमें पक्का संदेह है कि दोनों लड़कों को उनके जन्म के तत्काल बाद दंपतियों के हवाले करने के बदले प्रसूतिगृह संचालकों ने दाई के माध्यम से धन का लेन-देन किया था। हम इस बारे में आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं।