पश्चिम मध्य रेल में विभिन्न रेलखण्डों में गाड़ियों की स्पीड को बढ़ाने के लिए नई तकनीक का उपयोग कर रहा है। रेलखण्डों में गति को बढ़ाने के लिए महाप्रबंधक शोभना बंदोपाध्याय के मार्गदर्शन में विभिन्न अधोसरंचना के कार्यों को समय पर पूरा किया जा रहा है। तीनों मण्डलों पर थिक वेब स्विच एवं इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नल (आईबीएस) स्थापित किए जा रहे हैं। यह कार्य रेलवे के इंजीनियरिंग, दूरसंचार एवं संकेत, परिचालन और विद्युत विभाग के सामूहिक प्रयासों से किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, पश्चिम मध्य रेल ने चालू वित्तीय वर्ष के अप्रैल माह में 60 थिक वेब स्विच और 2 इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नल स्थापित किये हैं, जिसमें जबलपुर मण्डल पर 57 थिक वेब स्विच, भोपाल मण्डल पर 2 थिक वेब स्विच और कोटा मण्डल पर 1 थिक वेब स्विच रेल लाइनों में स्थापित किये गए हैं। इसी तरह इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नल के अंतर्गत जबलपुर मण्डल के विजयसोता-छैतनी एवं ब्यौहारी-डुबरीकलां रेलखण्ड स्टेशनों के बीच दो आईबीएस स्थापित किए गए हैं।
डिस्पैच और रिसीव में डिटेंशन हो रहा कम
गौरतलब है कि थिक वेब स्विच के लग जाने से सेक्शनल गति में वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिसके कारण गाड़ियों के डिस्पैच और रिसीव में डिटेंशन कम से कम हो रहा है। इसी प्रकार इंटरमीडिएट ब्लॉक सिगनलिंग प्रणाली (आईबीएस) से डबल लाइन सेक्शन पर रेलखंड क्षमता बढ़ाने के लिए की जाती है। आईबीएस के माध्यम से एक लंबे रेल खंड को दो खंडों में विभाजित कर ज्यादा से ज्यादा रेल गाड़ियां चलाई जा सकती हैं।
थिक वेब स्वीच से यह हो रहा फायदा
-
ट्रैक पर अनुमानित गति बढ़ाई जा सकती है
-
सामान्य प्वाइंट की तुलना में थिक वेब स्वीच की विश्वसनीयता बहुत अधिक है
-
संरक्षा की दृष्टि से सामान्य स्विच की तुलना में अधिक सुरक्षित है
-
इसे नई रेल लाइन की कंक्रीट स्लीपरों पर आसानी से लगाया जा सकता है, जो संरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है
-
सामान्य स्विच की तुलना में थिक वेब स्वीच की लाइफ तीन गुना अधिक होती है
इंटरमीडिएट ब्लॉक सिग्नल प्रणाली (आईबीएस) की मुख्य विशेषता
-
इससे इन खंडों के सेक्शन क्षमता में वृद्धि होगी
-
आईबीएस प्रणाली रेलगाड़ियों की निकटता को कम से कम करती है
-
ट्रेन की गति को बढ़ाती है, जिससे समय की बचत होती है