भोपाल के तालाबों के किनारे बने धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि सरकारी जमीन पर मस्जिदों का निर्माण और विस्तार लैंड जिहाद के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से आदेश जारी होने के बाद निश्चित रूप से कार्रवाई होगी।
राजधानी भोपाल के तालाबों के किनारे बने धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि भोपाल की खूबसूरती इसके तालाब हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर अतिक्रमण से नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। सारंग ने कहा कि सरकारी जमीन पर मस्जिदों का निर्माण और विस्तार लैंड जिहाद के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से आदेश जारी होने के बाद निश्चित रूप से कार्रवाई होगी। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि इस तरह की हठधर्मिता दिखाई जाएगी तो इसे सहन नहीं किया जाएगा। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। एनजीटी के निर्णय का पालन होगा।
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100 पुरानी मस्जिदें बनीं विवाद का कारण
शहर की दिलकश मस्जिद और भदभदा डैम के पास स्थित मस्जिद करीब 300 साल पुरानी बताई जाती हैं और दोनों वक्फ संपत्ति में पंजीकृत हैं। स्थानीय जानकार एडवोकेट रफी जुबेरी ने बताया कि इनका रिकॉर्ड 1937 से उपलब्ध है। दिलकश मस्जिद का गजट नोटिफिकेशन भी मौजूद है, वहीं भदभदा मस्जिद से सटे 1.44 एकड़ के कब्रिस्तान का प्रबंधन भी मस्जिद कमेटी के पास है।
सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई होगी
बता दें, 4 जुलाई को टीटी नगर तहसीलदार ने मस्जिद कमेटी को नोटिस भेजा था, जिसमें कहा गया था कि यह निर्माण अवैध है और इसे हटाया जाए। साथ ही 7 जुलाई को सुनवाई की तारीख भी तय की गई थी। इस बीच वक्फ बोर्ड ने आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि वक्फ संपत्ति पर बिना सुनवाई किसी भी प्रकार की कार्रवाई विधिसम्मत नहीं होगी। इसके लिए बोर्ड ने तहसीलदार को आपत्ति पत्र भेजा और एनजीटी में भी पक्षकार बनने की मांग की। प्रशासन ने कहा है कि मस्जिद समिति को बुलाकर सुनवाई होगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।