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भोपालः प्यारे मियां यौन शोषण मामले में बालिका गृह अधीक्षिका को हटाया, आईजी दीपिका सूरी के नेतृत्व में होगी एसआईटी जांच

Sat, 23 Jan 2021 07:23 PM IST
प्रियंका तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
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भोपाल: प्यारे मियां यौन शोषण केस - फोटो : सोशल मीडिया
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प्यारे मियां यौन शोषण केस की नाबलिग पीड़िता की मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। इस घटना के बाद बालिका गृह अधीक्षिका एनतेनिया इक्का को हटा दिया गया है और मौत के मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी गई है। देर रात एसआईटी की जांच के लिए बिंदु भी तय हो गए। टीम देखेगी कि नींद की गोलियां बालिका तक कैसे पहुंची, वार्डन के अलावा कौन-कब मिलने आया, इन सब बिंदुओं पर जांच होगी।

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दुख जताया

जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, कलेक्टर अविनाश लवानिया और डीआईजी भोपाल इरशाद वली को सुबह सीएम हाउस बुलाया था। इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा, 'बच्ची की मौत सिस्टम की बड़ी असफलता की कहानी बता रही है, लेकिन ये पता लगाना जरूरी है कि गड़बड़ी कहां हुई, कैसे हुई है, वह सामने आना चाहिए।'  इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने इस घटना के लिए एसआईटी का गठन करने का निर्देश दिया।

एसआईटी पूरे मामले पर रखेगी निगरानी

मुख्यमंत्री से निर्देश मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय स्तर पर एसआईटी का गठन कर दिया गया। इस टीम को आईजी दीपिका सूरी लीड करेंगी।

परिवार के आरोपों की होगी जांच

इस जांच के लिए पुलिस मुख्यालय में महिला अपराध शाखा की आईजी, आईपीएस अधिकारी दीपिका सूरी के साथ सीएसपी टीटी नगर और एक प्रशासनिक अधिकारी को भी शामिल किया गया है। यह एसआईटी बालिका गृह में बच्चियों के साथ हुए व्यवहार और पूरे घटनाक्रम के साथ बच्ची की मौत से लेकर परिवार के आरोपों की जांच करेगी। बच्ची के परिवार का आरोप है कि बालिका गृह के स्टाफ ने बच्ची को जहर दिया है। 

जम्मू-कश्मीर से पकड़ा गया था आरोपी

बता दें, लगभग छह महीने पहले एक अखबार के मालिक आरोपी प्यारे मियां के खिलाफ भोपाल और इंदौर के थाने में नाबालिग बच्चियों से यौन शोषण की एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में पांच नाबालिग बच्चियां पीड़ित हैं, जिसमें से एक बच्ची की दो दिन पहले मौत हो गई। इस मामले में फरार चल रहे आरोपी प्यारे मियां को जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार कर लिया गया था।

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पुलिस की भूमिका संदिग्ध

इस बच्ची ने बालिका गृह में बड़ी संख्या में नींद की गोलियां खा ली थीं। उसे हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पर उसकी मौत हो गई। आरोप है कि मौत के बाद पुलिस और जिला प्रशासन ने बच्ची के शव को परिवार को नहीं सौंपा बल्कि सीधे विश्राम घाट भदभदा ले गई और वहां पर परिवार को ले जाकर बच्ची का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार करा दिया।

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