फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhopal: ऑस्ट्रेलिया-रूस में भी लोग सीख रहे हिंदी, ऑस्ट्रेलिया के तीन प्रदेशों के पाठ्यक्रम में हिन्दी शामिल

Mon, 15 Sep 2025 07:39 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल में राष्ट्रीय हिंदी अलंकरण सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। हिंदी विद्वानों को सीएम डॉ. मोहन यादव द्वारा सम्मानित किया गया। विद्वानों ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया-रूस जैसे देशों में भी लोग हिंदी पढ़ और सीख रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के तीन प्रदेशों में हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल कर ली गई है।
विज्ञापन
सम्मानित होने वाले विद्वान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश के साथ अब दूसरे देशों में भी हिंदी को लोग पढ़ और सीख रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास कर रही हैं। खास बात यह है कि देश के साथ अब ऑस्ट्रेलिया-रूस जैसे देशों में भी लोग हिंदी पढ़ और सीख रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के तीन प्रदेशों में हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल कर ली गई है। रूस के कई विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाई जा रही है। इसी सिलसिले में राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय हिंदी अलंकरण सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें देश,प्रदेश के साथ ऑस्ट्रेलिया, रूस और श्रीलंका के हिंदी विद्वानों को सीएम डॉ. मोहन यादव द्वारा सम्मानित किया गया। 
विज्ञापन




ऑस्ट्रेलिया के दो विश्वविद्यालय में पढ़ा रहे हिंदी 
ऑस्ट्रेलिया से आई रीटा कौशल ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार का आभार प्रकट करती हूं कि उन्होंने मेरा चयन इतने बड़े सम्मान के लिए किया है। उन्होंने बताया कि मैं आगरा उत्तर प्रदेश में पैदा हुई थी मेरी जड़े वहां पर है। साल 2001 में मै सिंगापुर चली गई थी। वहां 4 साल तक हिंदी पढ़ती रही। दो उपन्यास भी लिखे और 2007 में ऑस्ट्रेलिया चली गई। वहां पर हिंदी समाज ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के साथ हिंदी के लिए काम किया। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया बहुत बड़ा देश है, वहां हर प्रांत में हिंदी के लिए सामुदायिक संस्था है जो अपना-अपना काम कर रही हैं। तीन स्टेट में हिंदी सरकारी पाठ्यक्रम का हिस्सा बन गई है। वहीं दो विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाई जा रही है।

रूस के 14 विश्वविद्यालय में पढ़ाई जाती हिंदी 
रूस से आई इंदिरा गजीबा ने बताया कि वे 30 साल से रूस के एक विश्वविद्यालय में हिंदी की शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि मै लगभग 25 साल से भारत आ रही हूं। यहां मुझे बहुत ज्यादा सम्मान मिलता है।उन्होंने बताया कि रूस के 14 यूनिवर्सिटी में हिंदी सिखाई जाती है। कई स्कूल भी हैं जहां हिंदी सिखाई जाती है। उन्होंने मध्य प्रदेश शासन का आभार व्यक्त किया और कहा कि मै बहुत आभारी हूं को मुझे यहां बुलाया गया और सम्मान दिया गया।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें-शिक्षक भर्ती परीक्षा का 4 माह में नहीं आया रिजल्ट, भोपाल की सड़कों पर उतरे अभ्यर्थी,DPI का किया घेराव

हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं पर तीसरी भाषा हावी
दिल्ली से आए विनोद बब्बर ने बताया कि भारतीय भाषाओं पर तीसरी भाषा हावी होने की कोशिश कर रही है।  बहुत बड़े स्तर पर उसने हमारी संस्कृति को हमारी भाषाओं को अपने लपेट में लिया है। उन्होंने कहा कि हिंदी को लेकर मै लगातार काम कर रहा हूं मेरी अभी तक 50 पुस्तक आ चुकी हैं। हमारा संकल्प है कि कहीं से भी कोई निमंत्रण प्राप्त पत्र प्राप्त होगा यदि हिंदी या भारतीय भाषाओं में होगा तभी जाएंगे वरना उस कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे। किसी भी ऐसे स्टोर से सामान नहीं खरीदेंगे जिसमें बाहर लगे साइन बोर्ड में हिंदी या भारतीय भाषाओं ना लिखा हो।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें-MP में लगेंगे 20000 स्वास्थ्य शिविर, 17 सितंबर को PM करेंगे स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ

विज्ञान के हिंदी शब्दकोश से बच्चों को हुई सरलता
शहडोल से आए सहायक अध्यापक डॉ. राधेश्याम नापित ने बताया कि उन्होंने 600 पेज की शब्दकोश नामक पुस्तक लिखा जिसमें विज्ञान के शब्दों को हिंदी में बताया गया है। जिसमें बायोलॉजी, बॉटनी, बायोकेमेस्ट्री बायोटेक्नोलॉजी के शब्दों को समायोजित किया है। उन्होंने बतााया कि जो बच्चे हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़कर जाते हैं उन्हें विज्ञान और अंग्रेजी के शब्द समझ में नहीं आते हैं। उन्होंने बताया कि मैं अभी तक आठ पुस्तक लिख चुका हूं। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को बहुत-बहुत साधुवाद देता हूं कि हम जैसे छोटे-छोटे कॉलेज के शिक्षकों को ढूंढ कर इतना बड़ा सम्मान दे रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें