शाही कब्रिस्तान की किरायादारी किए जाने के पीछे छुपी औकाफ-ए-शाही की मंशा से संबंधित कुछ अहम दस्तावेज शहर की युवा टोली के हाथ लगे हैं। वे अब ये दस्तावेज उलेमाओं और वक्फ बोर्ड के पदाधिकारियों को सौंपेंगे। कब्रिस्तान को लेकर किए गए इस कुत्सित प्रयास को रोकने के लिए औकाफ-ए-शाही की मुतवल्ली सबा सुलतान और जिला कलेक्टर से भी ये युवा गुहार लगाएंगे।
शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों की एक संयुक्त टीम शाही कब्रिस्तान की किरायादारी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। इस बीच की गई खोजबीन में इस टीम के हाथ कुछ अहम दस्तावेज लगे हैं, जिनसे इस किरायादारी की एक-एक परत खुल सकती है।
रविवार देर रात हुई इस टीम की बैठक में तय किया गया है कि इन दस्तावेजों को शहर के उलेमाओं को सौंपा जाएगा। इनसे मांग की जाएगी कि शहर के कब्रिस्तानों की बर्बादी की इस तहरीर पर शरई व्यवस्था बहाल करें। साथ ही मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष से भी उसके अधीन काम करने वाले औकाफ-ए-शाही पर नकेल कसने की मांग की जाएगी।
उलेमाओं ने दी थी क्लीन चिट
बड़ा बाग स्थित शाही कब्रिस्तान की करीब 25 हजार स्क्वायर फीट जमीन शर्मा कंस्ट्रक्शन कमेटी को किराए पर दी गई है। इस मामले की हलचल होने पर शहर मुफ्ती मोहम्मद अब्दुल कलाम खान कासमी ने मौका मुआयना किया था। इस दौरान उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि किरायदार ने किसी कब्र को नुकसान नहीं पहुंचाया है। इस बात को लेकर शरई व्यवस्था नहीं दी कि वक्फ कब्रिस्तान की जमीन का कामर्शियल इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। उन्होंने इस पर भी कुछ नहीं कहा कि वक्फ जायदाद पर ऐसी किरायादारी की जा सकती है या नहीं, जिससे भविष्य में स्थाई कब्जा हो जाने की संभावना बनी हुई हो। टीम का कहना है कि शाही कब्रिस्तान की जमीन पर भले सीमित स्थान पर दफन होता रहा हो, लेकिन शहर में आई महामारी और आपात स्थितियों में इस कब्रिस्तान की अलग-अलग जगहों पर दफन किए जाते रहे हैं। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि किरायादारी की गई जगह भी कब्रों से खाली हो।
वक्फ बोर्ड से अपेक्षा
मप्र वक्फ बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सनव्वर पटेल इस समय वक्फ जायदाद की सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान चलाए हुए हैं। हाल ही में उन्होंने उज्जैन और बीना की तत्कालीन कमेटियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। शाही कब्रिस्तान बचाने की मुहिम में जुटे युवाओं का कहना है कि इस मामले में दस्तावेजी सबूत देखने के बाद वक्फ बोर्ड निश्चित रूप से किरायादारी निरस्त करने का अहम फैसला लेंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले के दोषियों को सजा देकर भी भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने की पहल की जा सकती है।
ये है मामला
औकाफ-ए-शाही के तत्कालीन सचिव आजम तिरमिजी ने शाही कब्रिस्तान की करीब 25 हजार स्क्वायर फीट जमीन शर्मा कंस्ट्रक्शन कंपनी को करीब एक लाख, दस हजार रुपये महीना किराए पर दे दी है। करीब 11 महीने के इस किरायनामा के लिए वक्फ अधिनियम और सरकार के पट्टा अधिनियम को दरकिनार किया गया है। आश्चर्य ये है कि किरायादारी की दोषी कमेटी को हटाने और नई कमेटी बनने के बाद भी व्यवस्था सुधार नहीं हुआ है। नवागत सचिव सिकंदर हफीज ने भी इस किरायादारी को उचित करार दे दिया है। इस मामले में औकाफ ए शाही मुतवल्ली सबा सुलतान भी खामोशी धारण किए बैठी है।