मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा के बाद भी लाल घाटी से सुल्तानिया इंफ्रेंट्री तक जाने वाली सड़क का नाम शहीद वरुण सिंह के नाम पर नहीं हो पाया है। इसको लेकर शहीद के पिता कर्नल केपी सिंह से अमर उजाला ने बातचीत की। बता दें 8 दिसंबर 2021 को सीडीएस जनरल बिपिन रावत के साथ ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ने एक हैलीकॉप्टर हादसे में अपनी जान गंवा दी थी।
सवाल- कौन से वादे थे, जिनको सरकार अभी तक पूरा नहीं कर पाई?
केपी सिंह- प्रदेश सरकार ने चार घोषणा की थी। इसमें पहली सम्मान निधि मिल चुकी हैं। दूसरी सरकारी नौकरी की बात थी, लेकिन वो बच्चों की वजह से मेरी बहू करना नहीं चाहती है। तीसरा इंस्टीट्यूट का नाम रखना था, एक स्कूल का नाम रखा जा चुका है। चौथा एक मूर्ति लगाने की बात थी। हमने परिवार में बहुत चर्चा की, जिसमें उसकी देखभाल करना बहुत मुश्किल होता हैं। मुख्यमंत्री ने हमें बहुत आदर सम्मान दिया।
सवाल- सड़क का नाम रखने का वादा कब किया गया था?
केपी सिंह- मुख्यमंत्री जी, 6 मार्च, 2022 को स्वयं सम्मान निधि के चेक देने के लिए मेरे घर पर आए थे। हमने उनसे मांग की थी कि लालघाटी से सुल्तानिया इन्फेंट्री लाइन का अभी तक कोई नाम नहीं है। मूर्ति की जगह उस सड़क का नाम ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के नाम पर रखने की मांग की थी। उन्होंने हमारी मांग को तुरंत स्वीकार कर लिया था।
सवाल- फिर नाम रखने में कहां दिक्कत आ रही है। आप किन अधिकारियों से मिले?
केपी सिंह- मैं उसके बाद भोपाल के प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह से मिला। उन्होंने कहा कि यह हो जाएगा। मैं जिन अधिकारियों से मिला, उन्होंने बहुत आदर से बात की। उनकी कोई मजबूरी होगी। जहां तक अन ऑफिशियली मुझे पता चला है कि कोई विशेष व्यक्ति के इंट्रेस्ट की वजह से नहीं हो पा रहा हैं।
सवाल- आप सड़क का नाम रखने को लेकर कितनी बार अधिकारी और नेताओं के चक्कर लगा चुके हैं?
केपी सिंह- देखिए, मुझे अब गिनती याद नहीं है। मुझसे महापौर भी मिली थी और उन्होंने आश्वस्त किया कि नाम हो जाएगा। जब एमआईसी की पहली बैठक हुई तो पता चला कि इस पर सहमति नहीं हुई। इसका कारण बताया गया कि जिस सड़क का नाम वरुण सिंह के नाम पर करना चाहते हैं, उसका नाम 1996 में ही गुफा मंदिर के महंत के नाम पर किया जा चुका है। जबकि 26 साल से सड़क का नाम किसी को नहीं पता। मेरे ख्याल से कुछ और बात है, जिसकी वजह से बहाना बनाया जा रहा हैं। मुझे कहा गया कि कोई दूसरी सड़क चुन लो।
सवाल- कौन सड़क का नाम रखने से रोक रहा है?
केपी सिंह- देखिए, मुझे नाम पता है, लेकिन मैं मीडिया में नहीं बताऊंगा।
सवाल- अब आप आगे क्या करेंगे। किसी ने आपसे संपर्क किया?
केपी सिंह- देखिए, मुझे किसी अधिकारी का कोई कॉल नहीं आया। मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री को इस मामले में कोई जानकारी नहीं हैं। मैं अब उनसे मिलना चाहता हूं। इसका समाधान सीएम ही कर सकते हैं?
सवाल- आपको सीएम से मिलने गए थे? वहां मिलने नहीं दिया गया? इस पर राजनीति हो रही है?
केपी सिंह- पहली बात तो यह कि हमको सीएम से कैसे मिलना है, इसका प्रोटोकॉल पता नहीं। हम सीधे गए तो मुलाकात नहीं हो पाई। इस पर दो लोग राजनीति कर रहे हैं। यह गलत हैं।