बागेश्वर धाम से जुड़े प्रवचनकर्ता धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन एकता पदयात्रा को लेकर विवाद गर्माता जा रहा है। दलित-पिछड़ा समाज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष दामोदर यादव ने आरोप लगाया है कि शास्त्री ने हरियाणा के एक मंच से उन्हें गालियां दीं और जान से मारने की धमकी भी दी। यादव ने कहा कि वे इस यात्रा को रोकने के लिए 7 नवंबर को भोपाल हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे और सोमवार को विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा भी घोषित की।
आरोप-प्रत्यारोप और हिंसा की चेतावनी
दामोदर यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शास्त्री ने मंच से कहा कि जो लोग हमारी यात्रा रोकने की कोशिश करेंगे, मैं उनके मोबाइल पर ठठरी बार दे दूंगा। यादव ने बताया कि वे बुंदेलखंड से हैं और वहां ठठरी बार देना का मतलब किसी को जला देना होता है। उन्होंने कहा ऐसी भाषा किसी संत की नहीं हो सकती यह नालायक की भाषा है। यादव ने आगे कहा कि उनकी संगठन ने पहले से राष्ट्रपति को यात्रा रोकने का अनुरोध भेजा था और यदि राष्ट्रपति स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो सोमवार को वे कोर्ट के जरिए इसे रोके जाने की मांग करेंगे।
योजनाबद्ध विरोध-प्रदर्शन और पुतला दहन
यादव ने कहा कि 2 से 6 नवंबर के बीच प्रदेश के दर्जनों जिलों में धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और पुतला दहन होगा। भोपाल में 3 नवंबर को रोशनपुरा चौराहा पर प्रदर्शन और पुतला दहन की घोषणा की गई है, जिसके बाद प्रतिनिधि मंडल राजभवन जाकर राष्ट्रपति और राज्यपाल से इस यात्रा को रोकने का आग्रह करेगा। यादव ने कहा कि वे तय कर रहे हैं किस थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाए।
जमीन विवाद और गंभीर आरोप
दामोदर यादव ने शास्त्री पर जमीन सम्बन्धी भी गंभीर आरोप लगाए। यादव ने कहा कि डबरा में बनी मंदिर भूमि संदिग्ध है और उसे लेकर शिकायतें की जा चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वह भूमि पहले शुगर मिल की थी, जिसे लीज पर दिया गया था और फिर कथित तौर पर दान के जरिए उपयोग में लाया गया। यादव ने इस मामले की भी जांच कराने की बात कही और कहा कि यदि यह साबित हुआ तो शास्त्री “भू माफिया” की श्रेणी में आएँगे।
यह भी पढ़ें-
भोपाल के बड़े तालाब से EMC फैक्ट्रियों को पानी देने का निर्णय, एक्सपर्ट बोले-गहरा सकता है जल संकट
साधु-संतों में भी असहमति
यादव का दावा है कि कई साधु-संत भी इस यात्रा के खिलाफ हैं और मानते हैं कि यह देश के ताने-बाने व सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाएगी। उन्होंने कहा कि संतों की राय लेने के बाद आंदोलन और अधिक तेज किया जा सकता है।
यह भी पढ़ें-
सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर ली एकता की शपथ, भोपाल में होगा ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन
सामाजिक आलोचना और सवाल
यादव ने शास्त्री के उस दावे पर भी निशाना साधा जिसमें शास्त्री जाति-भेद को खत्म करने और हिंदू भाई-भाई की बात करते हैं, पर उनके व्यवहार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वे स्वयं किसी दूसरी जाति के साथ विवाह करने को तैयार हैं- यानी क्या प्रस्तावित बताई गई नीतियां वाचाल वक्तव्य से परे जाकर व्यवहार में भी लागू हैं?