फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhopal News: एम्स में ट्रांसजेंडर स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा, स्टैंडर्ड ऑफ केयर 2.0 जल्द होगा लागू

Fri, 31 Oct 2025 05:18 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

एम्स भोपाल में पहली राष्ट्रीय सीएमई-सह-कार्यशाला में घोषणा की गई कि जल्द ही स्टैंडर्ड ऑफ केयर संस्करण 2.0 लागू किया जाएगा। यह ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के मानक तय करेगा। इसमें चिकित्सा प्रक्रियाओं, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, परामर्श, सर्जिकल सेवाओं और सामाजिक सम्मान के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है।
विज्ञापन
एम्स में राष्ट्रीय सीएमई-सह-कार्यशाला - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एम्स भोपाल ने ट्रांसजेंडर समुदाय की स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त और संवेदनशील बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। संस्थान में आयोजित पहली राष्ट्रीय सीएमई-सह-कार्यशाला में यह घोषणा की गई कि जल्द ही स्टैंडर्ड ऑफ केयर संस्करण 2.0 लागू किया जाएगा। इस नई नीति के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यापक, मानकीकृत और संस्कृति-संवेदनशील रूप में लागू किया जाएगा।
विज्ञापन



 क्या है  स्टैंडर्ड ऑफ केयर 2.0 ?
स्टैंडर्ड ऑफ केयर 2.0 एक ऐसा अद्यतन दिशानिर्देश है, जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के मानक तय करेगा। इसमें चिकित्सा प्रक्रियाओं, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, परामर्श, सर्जिकल सेवाओं और सामाजिक सम्मान के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। नए संस्करण का उद्देश्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डॉक्टरों, नर्सों और चिकित्सा संस्थानों को ट्रांसजेंडर समुदाय की आवश्यकताओं और अधिकारों को समझने के लिए प्रशिक्षण और दिशानिर्देश प्रदान करेगा।

एम्स भोपाल देश के लिए एक मॉडल बने
 डॉ. रोशन एफ. सुतार, नोडल अधिकारी, ट्रांसजेंडर हेल्थ सर्विसेज, एम्स भोपाल ने बताया कि यह संस्करण ट्रांसजेंडर स्वास्थ्य सेवाओं को भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के अनुरूप ढालने का प्रयास है। हमारा लक्ष्य है कि एम्स भोपाल देश के लिए एक मॉडल बने।
विज्ञापन



एम्स भोपाल की पहल
एम्स भोपाल ने ट्रांसजेंडर स्वास्थ्य सेवाओं पर यह पहली राष्ट्रीय सीएमई (कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) आयोजित की। पांच घंटे की इस कार्यशाला में डॉक्टरों, नर्सों, रेजिडेंट्स और फैकल्टी को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की जरूरतों औ संवेदनशीलताओं के प्रति जागरूक किया गया। कार्यशाला का आयोजन एलायंस इंडिया, अनमोल समाज सेवी संस्था और एसोसिएशन फॉर ट्रांसजेंडर हेल्थ इन इंडिया (ATHI) के सहयोग से हुआ। एम्स भोपाल के डीन (एकेडमिक) प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी और डीन (रिसर्च) प्रो. (डॉ.) रेहान उल हक ने कहा कि यह पहल चिकित्सा क्षेत्र में समावेश और समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

यह भी पढ़ें-सीएम बोले-सरदार पटेल के मार्ग पर चलेंगे तो भारत को कोई बुरी नजर से नहीं देख सकेगा
विज्ञापन


 विशेषज्ञों और समुदाय की सहभागिता
कार्यक्रम में एयर कमोडोर (डॉ.) संजय शर्मा (से.नि.), अमृता सरकार, अनुभूति भट्टाचार्य, माजिद खान, सौभाग्य, डॉ. बेला शर्मा, सिमरन अरोरा और अन्य विशेषज्ञों ने भाग लिया। ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए अस्पतालों में ट्रांस-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर, अलग बेड और सुरक्षित माहौल की आवश्यकता पर जोर दिया। ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट अमृता सरकार ने कहा कि  एम्स भोपाल ने जिस संवेदनशीलता के साथ यह पहल शुरू की है, वह देश के बाकी संस्थानों के लिए प्रेरणा बन सकती है।

यह भी पढ़ें-भोपाल के बड़े तालाब से EMC फैक्ट्रियों को पानी देने का निर्णय, एक्सपर्ट बोले-गहरा सकता है जल संकट

 उद्देश्य और आगे की दिशा
-ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समावेशी और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं को संस्थागत रूप देना।
-डॉक्टरों और नर्सों को सांस्कृतिक रूप से सक्षम चिकित्सा प्रशिक्षण देना।
-अस्पतालों में ट्रांस-फ्रेंडली माहौल तैयार करना।
-ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए विशेष प्रोटोकॉल विकसित करना।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें