13 साल पहले बने बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने का काम शनिवार से शुरू हो जाएगा। यह काम रात में किया जाएगा, ताकि ट्रैफिक की समस्या ना हो। बस स्टॉप को हटा कर पीछे लगाने का काम उसे लगाने वाली एजेंसी ही करेगी। पूरे कॉरिडोर को तोड़कर अगले दो महीने में सेंट्रल डिवाइजर बनाने का काम पूरा कर दिया जाएगा, जिससे वाहन मिक्स लेन में चलेंगे। इस काम पर करीब 18 से 20 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह और भोपाल नगर निगम कमिश्नर फ्रेंक नोबल ने शुक्रवार रात को कॉरिडोर हटाने को लेकर निरीक्षण किया। बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने का काम लोक निर्माण विभाग संत हिरदाराम नगर से करेगा। वह यहां पर हलालपुर से विसर्जन घाट तक चार किमी का कॉरिडोर हटाएगा।
2.3 किलोमीटर का बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर
दरअसल, यहां पर 2.3 किमी का एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। 228 करोड़ में छह लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर बनेगा। इसके नीचे आठ लेन का साइकिल ट्रैक, फुटपाथ, सर्विस लेन और फोर लेन मिक्स सड़क होगी। यहां से बीआरटीएस कॉरिडोर को हटा कर उसके लोहे को निकालकर सेंट्रल डिवाइडर में उपयोग किया जाएगा। यह काम एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने वाली एजेंसी ही करेंगी। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से ट्रैफिक की समस्या खत्म होने के साथ ही बैरागढ़ में व्यवसायिक गतिविधियों को फायदा होगा।
48 से अधिक बस स्टॉप भी हटेंगे
इसके बाद मिसरोद से एम्प्री तक, रोशनपुरा से कमलापार्क और कलेक्टोरेट से लालघाटी हलापुर बस स्टैंड तक बीआरटीएस को तोड़ने का काम नगर निगम की तरफ से चयनित एजेंसी करेंगी। इसे हटाते वक्त दोनों तरफ एक से डेढ़ मीटर तक सेफ्टी बैरिकेडिंग की जाएगी। संत हिरदाराम नगर से मिसरोद तक कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 24 किमी है। इसमें से 4 किमी डेडिकेटेड लेन पहले ही हट चुकी है। ऐसे में 20 किमी कॉरिडोर को हटाने जाने की कवायद होगी। इसके साथ 48 से अधिक बस स्टॉप भी हटेंगे। सिटी बसें बंद नहीं होंगी। वे दोनों लेन पर दौड़ेंगी।
360 करोड़ रुपये खर्च कर बनाया
बता दें, तत्कालीन शिवराज सरकार ने भोपाल बीआरटीएस को 2011 में संशोधित डीपीआर के बाद मंजूरी दी थी। इसका काम दो साल बाद सितंबर 2013 में पूरा हुआ था। इसमें संत हिरदाराम नगर बैरागढ़ से लेकर मिसरोद तक का 24 किलोमीटर का निर्माण किया गया। इस पर करीब 360 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।