पीएफ की राशि कंपनी द्वारा जमा नहीं करने से नाराज भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (बीसीएलएल) के 450 चालक और परिचालक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इससे 149 बसों के पहिए थम गए हैं। इस आंदोलन से राजधानी भोपाल के छह रूटों पर हजारों यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। लगातार दूसरे दिन शनिवार को भी बसें नहीं चलाई गईं। बागसेवानिया डिपो में चालक और परिचालकों ने जमकर विरोध प्रदर्शन कर बीसीएलएल और बस आपरेटर के खिलाफ नारेबाजी की।
बीसीएलएल के चालक और परिचालकों का कहना है कि हम सुबह से लेकर रात तक मेहनत करके पसीना बहाते हैं। बीसीएलएल और बस आपरेटर के बीच के आपसी मतभेद का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। बस आपरेटर मां एसोसिएट ने कर्मचारियों को पीएफ और ईएसआईसी का पैसा पिछले दो-तीन साल से जमा नहीं करा है। यह अनिश्चितकालीन हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक चालक और परिचालकों के पीएफ और ईएसआइसी का पैसा खाते में जमा नहीं होता। उधर, इस संबंध में बीसीएलएल के पीआरओ संजय सोनी का कहना है कि कर्मचारी और बस आपरेटर से बात करके हड़ताल को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
पहले भी कर चुके हैं हड़ताल
कर्मचारियों ने चार-छह महीने पहले भी पीएफ और ईएसआइसी की राशि जमा नहीं होने पर हड़ताल की थी। लेकिन बीसीएलएल ने इस मामले शांत करवा दिया था। इस बार भी बीसीएलएल के अफसर 10 दिन की मोहलत मांग रहे हैं। उनका कहना है कि बस आपरेटर से बात करके दो-दो महीने में चालक और परिचालकों की राशि खाते में जमा करवा दी जाएगी। लेकिन कर्मचारियों ने मिलकर निर्णय लिया है कि जब तक राशि जमा नहीं होती हड़ताल जारी रहेगी।
इसलिए नहीं जमा हो पा रही पीएफ और ईएसआइसी की राशि
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, बीसीएलएल से बस आपरेटर को आठ करोड़ 80 लाख रुपये लेना है। वह राशि का पेमेंट नहीं कर रहा है। इस कारण चालक और परिचालकों के पीएफ और ईएसआइसी की राशि जमा नहीं हो पा रही है। सभी कर्मचारियों ने मिलकर निर्णय लिया है कि कहीं जाकर ज्ञापन नहीं देंगे। कर्मचारी डिपो पर हड़ताल पर रहेगी, यहीं पर प्रदर्शन करेंगे।
इन रूटों बंद है बसों का संचालन
गांधी नगर से अयोध्या बाइपास, ईदगाह हिल्स से लेकर भोपाल एम्स, पुतलीघर से बंगरासिया, कोकता से लालघाटी, कोच फैक्ट्री से बैरागढ़ चीचली, आकृति इको सिटी से चिरायु अस्पताल तक चलने वाली लो-फ्लोर बसों के हजारों यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए आटो और अन्य चालकों से लिफ्ट लेकर पहुंचे।