धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा एडवोकेट राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य ओबीसी महासभा
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मध्य प्रदेश में 13% ओबीसी आरक्षण पर रोक को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। ओबीसी महासभा की ओर से अधिवक्ता वरुण ठाकुर, धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा और एड. रामकरण ने पक्ष रखा। ओबीसी पक्षकार से कहा गया कि परीक्षा हो चुकी है, भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन नियुक्ति नहीं दी जा रही है। छत्तीसगढ़ जैसी राहत दी जाए। करीब साढ़े चार मिनट की बहस चली। इस पर अनारक्षित वर्ग द्वारा 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिए जाने पर बात रखी गई। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अगले मंगलवार (12 अगस्त) को सबसे पहले सुनवाई के लिए रखने का आदेश दिया है।
यह है पूरा मामला
गौरतलब है कि एमपी में 2019 में ओबीसी को 27% आरक्षण देने के लिए एक्ट पास हुआ था, लेकिन अभी तक भर्तियां नहीं हो रही हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। 22 जुलाई को हुई सुनवाई में मप्र सरकार ने राहत की मांग की। उन्होंने कहा कि जैसे छत्तीसगढ़ में 58% आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने मान्यता दी है, वैसे ही मप्र को भी राहत दी जाए ताकि भर्ती प्रक्रिया पूरी हो सके। ओबीसी पक्षकार ने भी एक्ट को लागू करने की मांग की, जबकि अनारक्षित पक्ष ने आपत्ति जताते हुए कहा कि मप्र और छत्तीसगढ़ के मामलों में अंतर है, क्योंकि मप्र में ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% किया गया, जबकि छत्तीसगढ़ में एसटी आबादी अधिक होने के कारण वहां का आरक्षण पहले जैसा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को बिना आदेश के आगे बढ़ा दिया था।
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27 फीसदी आरक्षण डंके की चोट पर दिया जाएगा
एमपी के सीएम डॉ. मोहन यादव ने 29 जुलाई को विधानसभा में कहा था कि ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण डंके की चोट पर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि 13 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को उनका हक मिले और उनकी नौकरी योग्यता के आधार पर तय हो।
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अलगी सुनवाई 12 अगस्त को होगी
राष्ट्रीय कोर कमेटी सदस्य ओबीसी महासभा एडवोकेट धर्मेंद्र सिंह कुशवाहा ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार में लाखों रिक्तियां हैं इसके बावजूद सरकार कोर्ट का बहाना बनाकर न तो 27 प्रतिशत आरक्षण दे रही थी न ही नई भर्तियां कर रही थी। परन्तु आज की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लताड़ते हुए कहा है कि जब कानून में किसी भी प्रकार की रोक नहीं है तो आप 27 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दे रहे हैं। उन्होने बताया कि अलगी सुनवाई 12 अगस्त को होगी।