राजधानी भोपाल स्थित राष्ट्रीय नेशनल पार्क वन विहार में विदेशी प्रजाति की छिपकली इगुआना का दीदार शुरू हो गया है। मध्य प्रदेश के किसी भी राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार इस तरह की छिपकली देखने को मिल रही। खास बात यह है कि यह सामान्य छिपकली से 100 गुना तक ज्यादा वजनी होती है। इसका सामान्य साइज 1.5 से 3 मीटर तक होता है। जबकि वजन 5 किलो से भी ज्यादा होता है। वहीं इसे तीसरी आंख वाली छिपकली भी कहा जाता है। दरअसल इसके सिर के ऊपर तीसरी आंख होती है। यह तीसरी आंख हल्के शल्क के जैसी होती है।
दिल्ली के तश्कर से जप्त की गई है इगुआना
दरअसल 4 इगुआना इंदौर एसटीएफ ने दिल्ली के रहने वाले कार्तिक गोयल से बरामद की थी। कार्तिक ने एसटीएफ को बताया कि वह विदेशों से लोकर भारत में इगुआना की तश्करी करता था। इसके पास से जब्त की गई इगुआना को एसटीएफ ने बाद में वन विहार को सौंपा दिया था। जानकारी के मुताबिक एसटीएफ इंदौर ने तेलंगाना से 4 इगुआना और 4 पाइथन जप्त किया था। इन जानवरों को बिना परिवेश पोर्टल पर पंजीयन किए पालना भी अपराध है। वहीं इसका व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है. इंदौर एसटीएफ को आरोपित ने बताया था कि वो विदेशों से लाकर तेलंगाना और उत्तरप्रदेश के बुलंद शहर में इगुआना और पाइथन की अवैध तश्करी करता था.
मैक्सिको, अमेरिका और साउथ अफ्रीका की प्रजाति
अधिकारियों ने बताया कि इगुआना मैक्सिको, अमेरिका और साउथ अफ्रीका के कुछ हिस्सों के अलावा उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में पाई जाती है। तश्करो से मुक्त कराने के बाद इगुआना को वन विहार में दो महीने तक क्वारंटाइन रखा गया था। इस दौरान डाक्टर इनकी निरंतर निगरानी कर रहे थे। लेकिन अब चारों इगुआना वन विहार के अनुकूल हो गए हैं। ऐसे में उन्हें प्रदर्शनी के बाड़ों में छोड़ दिया गया है। अब इन इगुआना को देखने के लिए प्रतिदिन पर्यटकों की भीड़ पहुंच रही है।
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खास तरह के प्रदर्शनी बाड़ो में छोड़ा गया
वन विहार की असिस्टेंड डायरेक्टर डॉ. रुही हक ने बताया कि इंदौर एसटीएफ ने ट्रेन से एक तश्कर को पकड़ा था। जिसके पास से इगुआना और पाइथन जप्त किए गए थे। वन विहार मध्यप्रदेश का रेस्क्यू और डिटेंशन सेंटर है, इसलिए पुलिस ने अवैध तश्करी से जप्त जानवरों को भोपाल भेजा गया था। डॉ. रुही ने बताया कि इनको दो महीने तक क्वारंटाइन रखने के बाद खास तरह के प्रदर्शनी बाड़ो में छोड़ा गया। इनके एनक्लोजर के जो भी नियम है, वन विहार उसे फालो कर रहा है। डॉ. रुही ने बताया कि इगुआना के एनक्लोजर में खास ध्यान रखा गया है। इगुआना अधिक वर्षा वाले वनों में भी रहते हैं और रेगिस्तानी इलाकों में भी। इनको धूप भी चाहिए होती है और पानी भी. इसीलिए इनके बाड़े में उपर से धूप आने के लिए जगह छोड़ी गई है। वहीं जमीन में पानी भी भरा गया है. डा. रुही ने बताया कि इनको अभी वन विहार में कद्दू समेत अन्य शाकाहारी भोजन दिया जा रहा है। जिसे ये मजे से खा रहे हैं।
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