बारिश के साथ ही राजधानी भोपाल में डेंगू और चिकनगुनिया के केस बढ़ने लगे हैं। शहर में अब तक 52 लोग डेंगू और 55 लोग चिकनगुनिया की चपेट में आ चुके हैं। जबकि मलेरिया विभाग का दावा है कि उनकी 44 टीमें फील्ड पर लार्वा सर्वे का काम कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि चिकनगुनिया के मरीजों को ज्यादा परेशानी हो रही है। कई मरीजों को बुखार लंबे समय तक नहीं उतरने और प्लेटलेट काउंट कम होने के कारण अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
अब तक 2 लाख घरों में हुआ सर्वे
भोपाल सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि जनवरी से अब तक लगभग 2 लाख घरों का सर्वे किया जा चुका है, जिनमें से 6 हजार से अधिक घरों में लार्वा मिला है। वर्तमान में 44 से ज्यादा टीमें लार्वा खोजने और नष्ट करने के कार्य में लगी हुई हैं। उन्होने कहा कि आगे अगर जरूरक पड़ी तो समीक्षा कर टीमों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले की मलेरिया टीम के काम की समीक्षा की जा रही है। नगर निगम के साथ मिलकर डेंगू और चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
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डेंगू वार्ड तैयार
जेपी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. राकेश श्रीवास्व ने बताया कि बारिश का महीना शुरू होने के साथ डेंगू चिकनगुनिया के मरीज भी बढ़ने लगते हैं। इस बार चिकनगुनिया का खतरा ज्यादा दिख रहा है। चिकनगुनिया के मरीजों को ठीक होने में ज्यादा समय लग रहा है। उन्होने बताया कि जेपी अस्पताल में पहले से डेंगू वार्ड तैयार किए गए हैं।
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एक स्थान पर पानी जमा होने से पनपते हैं मच्छर
जिला मलेरिया अधिकारी अमृता नामदेव ने बताया कि हमारी 44 टीमें फील्ड पर काम कर रही है जरूरत पड़ी तो और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि लोगों की लापरवाही की वजह से पानी स्टोर होता है और लार्वा पनपने लगता है। ऐसे लोगों को जागरूक करने के लिए टीमें घर-घर जा रहीं है। उन्होंने बताया कि बारिश के बाद पानी लंबे समय तक एक स्थान पर जमा होने से लार्वा पनप जाता है। इसलिए लोगों से बार-बार अपील की जा रही है कि पानी को जमा न होने दें। हमारी टीमें भी लार्वा सर्वे कर रही हैं। उन्हें सहयोग करें, ताकि लार्वा खत्म करने में मदद मिल सके।