Hindi Universit: कांग्रेस ने अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि विश्वविद्यालय द्वारा बैचलर ऑफ इलेक्ट्रोहोम्योपैथी एवं सर्जरी जैसे मान्यता विहीन पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे छात्रों का भविष्य खतरे में है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि विश्वविद्यालय द्वारा बैचलर ऑफ इलेक्ट्रोहोम्योपैथी एवं सर्जरी जैसे मान्यता विहीन पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे छात्रों का भविष्य खतरे में है।कांग्रेस विचार विभाग के अध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट किया है कि इन पाठ्यक्रमों को मान्यता नहीं दी गई है और भविष्य में भी ऐसी कोई योजना नहीं है। इसके बावजूद, विश्वविद्यालय मान्यता का फैसला लगभग तय जैसे भ्रामक विज्ञापन जारी कर छात्रों को गुमराह कर रहा है।
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फीस के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले
उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों छात्रों से प्रवेश और कोर्स फीस के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले जा रहे हैं, और प्रदेश भर में मशरूम की तरह उगे दर्जनों अध्ययन केंद्र छात्रों को ठगने का काम कर रहे हैं। उन्होंने सरकार पोषित संस्थानों पर शिक्षा का बंटाधार करने का भी आरोप लगाया।
मामले की सीबीआई जांच की मांग
गुप्ता ने कहा कि 2006 में हुए एक ऐसे ही मामले का जिक्र किया, जिसमें खेल एवं युवक कल्याण संचालनालय ने रोजगार की गारंटी के साथ छात्रों से फीस वसूली थी, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस मामले की सीबीआई जांच कराई जाए, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके और छात्रों को न्याय मिल सके।
50-50 हजार फीस वसूली गई
भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा है कि 2006 में मध्य प्रदेश सरकार के खेल एवं युवक कल्याण संचालनालय द्वारा रोजगार की गारंटी के साथ एक स्विटजरलैंड की अंतर्राष्ट्रीय कंपनी कूनो (ज्ञवनदव जवनते-जतंअमसे) के माध्यम से डिप्लोमा इन टूर्स एवं ट्रेवल, डिप्लोमा इन वीएलसीसी वेलनेस पार्लर एवं अन्य अलग-अलग कोर्सों में सैकड़ो बच्चों के एडमिशन किए गए थे, उनसे 50-50 हजार फीस वसूली गई। विज्ञापन में सौ फीसदी नौकरी और स्कालरशिप का वादा किया गया था किंतु उन बच्चों को ना तो नौकरी मिली ना ही सर्टिफिकेशन हुआ। सरकार ने इस खुली लूट की जांच शुरु की कितु उस जांच को लीपापोती एक्सप्रेस कुचलती चली गई। लीपापोती एक्सप्रेस के प्रयास से दोषी पुलिस अधिकारी तो बच गये मगर हजारों बच्चे सरकारी भ्रम के माध्यम से ठगी का शिकार हुए और वे आज तक भटक रहे हैं।