जानिए, क्या है मामला?
जानकारी के अनुसार 29 वर्षीय युवती पूजा पिता विष्णु प्रसाद मैथिल मंडीदीप की रहने वाली थी। वह मिसरोद थाना क्षेत्र स्थित कोरल वुड कॉलोनी में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का काम करती थी। एक अक्टूबर को पूजा शाम करीब 6:30 बजे घर जाने के लिए कोरल वुड कॉलोनी से निकलीं और सड़क पार कर रही थीं। इसी दौरान एक तेज रफ्तार वाहन चालक ने उसे टक्कर मारी और फरार हो गया। हादसे में युवती को गंभीर चोटें आई थी। लोगों की मदद से उसे सागर मल्टी स्पेशलिस्ट अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान 2-3 अक्टूबर की रात उसकी मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों का भी पता नहीं लगा पाई पुलिस
मृतक के परिजनों ने बताया कि मिसरोद थाना पुलिस और जांच अधिकारी घटनास्थल का सीसीटीवी फुटेज नहीं होने के कारण वाहन और उसके चालक का पता नहीं लगा पाने की बात कह रहे हैं। जबकि, पहले फुटेज नहीं होने के बाद भी मामला हल होते थे। पुलिस की जांच सुस्त पड़ी हुई है। बेटी की मौत के 22 दिन बाद भी आरोपी और एक्सीडेंट करने वाले वाहन चालक का पता नहीं चलने से मृतका के परिजनों का धैर्य जवाब दे रहा है। उन्होंने पुलिस पर जांच नहीं करने का आरोप लगाया है।
सुराग हाथ नहीं लगा
विवेचना अधिकारी एएसआई मुकेश बेदरे ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है,आरोपी वाहन चालक का पता लगाया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई सुराग हाथ नहीं लगा है।
कैसे आरोपी का पता लगाएं
मिसरोद टीआई मनीष राज भदौरिया का कहना हे कि दुर्घटना वाली जगह पर कोई कैमरा ही नहीं है। ना ही कोई बताने वाला है। ऐसे में कैसे आरोपी का पता लग पाएगा।
सीएम हेल्पलाइन पर मांगी मदद
पुलिस की कार्रवाई से नाराज परिजनों ने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत की है। इसके बाद भी पुलिस की ओर से कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है। परिजनों का कहना है कि पुलिस सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायत वापस लेने के लिए कई बार फोन कर चुकी है। लेकिन, अब तक आरोपी की तलाश नहीं कर पाई है।
जांच में पुलिस की लापरवाही
घटना के बाद परिजनों ने ही अपने स्तर पर सीसीटीवी देखना शुरू किया, जिसके बाद कोरल वुड सोसाइटी के कैमरे से घटना के समय की जानकारी मिली। वहीं परिजनों ने कई शोरूम और रहवासियों से भी घटना में मदद मांगी। इस दौरान महिन्द्रा कार (मिसरोद) शोरूम पर लगे सीसीटीवी देखने के लिए परिजन गए थे, लेकिन उन्हें यह कहते हुए मना कर दिया गया कि पुलिस के आने पर ही वह फुटेज दिखा सकते हैं। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि पुलिस की ओर से इस तरह के कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।