बच्चे को जब अस्पताल लाया गया था।
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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 13 महीने के एक मरणासन्न बच्चे को डॉक्टर्स ने नई जिंदगी दी है। मासूम बच्चा गंभीर कुपोषण, टीबी और खून की कमी से जूझ रहा था। उसे बार बार तेज बुखार आता और उल्टी होती थी। इस बात से परेशान परिजन गैरतगंज से बच्चे को लेकर भोपाल एम्स पहुंचे। यह देखते हुए एम्स भोपाल की पेडियाट्रिक ओपीडी के डॉक्टर्स ने बच्चे को तत्काल स्मार्ट यूनिट में भर्ती कर लिया।
एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) अजय सिंह ने बताया कि 13 महीने के बच्चे का वजन मात्र पांच किलो और लंबाई 73 सेंटीमीटर थी। जांच में पाया गया कि बच्चे में गंभीर कुपोषण, फेफड़ों की टीबी और खून की कमी जैसी समस्याएं हैं। स्थिति इतनी गंभीर थी यदि बच्चे को सही इलाज न मिलता तो उसकी मौत तक हो सकती थी। लेकिन एम्स भोपाल के पीडियाट्रिक विभाग के डॉक्टरों ने बच्चे के कठिन इलाज की चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया। इससे बच्चे को नया जीवन मिला है। तीन महीने में ही बच्चे के वजन और लंबाई भी बढ़ गई है। अब सामान्य बच्चों की तरह उसका विकास हो रहा है।
एम्स में ऐसे किया गया इलाज
13 महीने के रुहान को 8 दिसंबर 2023 में एम्स लेकर आए थे। तब उसका वजन वजन 5.165 किलोग्राम और लंबाई 73 सेमी थी। तब डॉक्टर्स ने पहले फेफड़ों की टीबी कंट्रोल करने के लिए दवा दी। करीब 15 दिन भर्ती रहने के बाद बच्चे का वजन 5 किलो 939 ग्राम हो गया, हीमोग्लोबिन का स्तर भी सुधरा। 15 दिन के बाद जब बच्चे को डिस्चार्ज किया गया तब उसका वजन 6.10 किलोग्राम और एमयूएसी 8.9 सेमी था। बाद में जब रुहान को पहली बार फॉलोअप के लिए आया तब उसका वजन 7.040 किलोग्राम हो गया। चौथी बार फॉलोअप में बच्चे का वजन 8.200 किलोग्राम हो गया।