भोपाल पुलिस होटलों में ठहरने वाले मेहमानों की आईडी का रियल टाइम ऑनलाइन वेरिफिकेशन करेगी। एआई सिस्टम फर्जी या छेड़छाड़ वाले दस्तावेजों को फ्लैग कर पुलिस को अलर्ट देगा। पायलट प्रोजेक्ट एमपी नगर से शुरू होकर पूरे शहर में लागू होगा।
राजधानी भोपाल के होटलों में फर्जी पहचान-पत्र (आईडी) के सहारे ठहरने वाले अपराधियों, संदिग्धों और जालसाजों पर अब पुलिस शिकंजा कसने की तैयारी में है। लव-जिहाद, दुष्कर्म, धोखाधड़ी और साइबर फ्रॉड जैसे मामलों में फर्जी आईडी के इस्तेमाल को देखते हुए भोपाल पुलिस कमिश्नरेट अत्याधुनिक ऑनलाइन वेरिफिकेशन मैकेनिज्म लागू करने जा रहा है। इसके तहत होटल में ठहरने वाले हर अतिथि की जानकारी पुलिस कंट्रोल रूम तक रियल टाइम में पहुंचेगी। जाली या छेड़छाड़ किए गए दस्तावेज सामने आते ही एआई आधारित सिस्टम अलर्ट जारी करेगा। इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र एमपी नगर थाना क्षेत्र से की जा रही है।
सॉफ्टवेयर कंपनी के सहयोग से तैयार हो रहा डिजिटल प्लेटफॉर्म
इस तरह काम करेगा नया सिस्टम
होटल संचालक चेक-इन के समय ही अतिथि का आईडी प्रूफ पुलिस के ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करेंगे। होटल में आने और जाने वाले मेहमानों का पूरा डेटा पुलिस को डिजिटल रूप से लाइव दिखाई देगा। पोर्टल में मौजूद एआई और वेरिफिकेशन टूल फर्जी या छेड़छाड़ किए गए दस्तावेजों को फ्लैग करेंगे। इसके बाद संबंधित थाने और पुलिस कंट्रोल रूम को ऑटोमैटिक अलर्ट मिलेगा। इससे पुलिसकर्मियों को बार-बार होटलों में जाकर मैनुअल रजिस्टर खंगालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसलिए पड़ी सख्त कदम की जरूरत
हाल के दिनों में राजधानी के होटलों में फर्जी दस्तावेजों के जरिए ठहरने के कई गंभीर मामले सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, जबलपुर में हत्या को अंजाम देकर आया एक आरोपी भोपाल के आईएसबीटी के पास स्थित होटल में फर्जी पहचान-पत्र के सहारे ठहरा था। पुलिस को इसकी भनक लगने तक आरोपी वहां से फरार हो चुका था।
दूसरा मामला पिपलानी क्षेत्र का है। यहां एक होटल में फर्जी पहचान-पत्र के आधार पर एक युवक और दो लड़कियां ठहरी थीं। जांच में एक लड़की नाबालिग पाई गई। इसके बाद पुलिस ने पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। मामले में नाबालिग के परिजन बनकर युवक को ब्लैकमेल कर ठगी करने वाली एक महिला सहित तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
होटल संचालकों को भी मिलेगी राहत