सतना नगर निगम की जल व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर में लगातार मिल रहे दूषित और अपर्याप्त पानी की सप्लाई से परेशान कांग्रेस पार्षदों ने शुक्रवार दोपहर फिल्टर प्लांट पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन को केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि कुछ भाजपा पार्षदों ने भी इसमें शामिल होकर अपना समर्थन जताया, जिससे नगर निगम प्रशासन पर दबाव और अधिक बढ़ गया।
भाजपा पार्षद भी हुए शामिल
एक साल से विकराल समस्या- नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष मिथलेश सिंह ने बताया कि शहरवासी पिछले लगभग एक साल से दूषित और कम पानी की समस्या से लगातार जूझ रहे हैं। इस जल संकट को कई बार अधिकारियों और निगम परिषद की बैठकों में उठाया गया, लेकिन हर बार नतीजा 'ढाक के तीन पात' ही साबित हुआ।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष का आरोप है कि अतिवृष्टि के बाद भी राहत उपलब्ध नहीं हो सकी। हैरानी की बात यह है कि इस सीजन में अच्छी बारिश और अतिवृष्टि होने के बावजूद शहर के कई वार्डों में लोगों को पीने का पानी तक नसीब नहीं हो रहा है और अधिकांश इलाकों से लगातार गंदे पानी की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि निराकरण नहीं किया, तो कांग्रेस पार्षद आगे चलकर उग्र अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
SCADA सिस्टम पर गंभीर सवाल
पार्षदों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी पार्षदों की प्रमुख मांगें हैं कि जलप्रदाय प्रक्रिया में पानी को साफ करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रसायनों की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। नियमित और निर्धारित सप्लाई की जाए तथा पानी की सप्लाई का एक निश्चित समय तय किया जाए, ताकि शहरवासियों को नियमित रूप से पानी मिल सके।
पानी की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से प्रयोगशाला (लैब) में जांच कराई जाए। साथ ही, जलप्रदाय के निजीकरण को पूरी तरह समाप्त किया जाए और इस व्यवस्था का संचालन सीधे तौर पर निगम प्रशासन के माध्यम से किया जाए।
चार घंटे बाद मिला लिखित आश्वासन
नगर निगम के फिल्टर प्लांट में भाजपा एवं कांग्रेस पार्षदों का तकरीबन चार घंटे तक धरना-प्रदर्शन चला। मौके पर निगम के जल प्रभारी ईई राहुल पटेल एवं मुकेश चतुर्वेदी ने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया और समस्या के निदान का उचित आश्वासन दिया।