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रिटायर्ड आईएएस हत्याकांड: आरोपी ने मोबाइल में सिम लगाई तो मथुरा में मिली लोकेशन, तीन राज्यों की पुलिस एक्टिव

Fri, 02 Oct 2026 07:10 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद फरार केयरटेकर वरुण कुमार की आखिरी लोकेशन उत्तर प्रदेश के मथुरा में मिली है। पुलिस के मुताबिक उसने अग्रवाल के मोबाइल में अपनी पुरानी सिम डालकर फोन चालू किया था। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पंजाब पुलिस उसकी तलाश कर रही हैं।
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रिटायर्ड आईएएस राकेश अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद फरार हुए उनके केयरटेकर वरुण कुमार की तलाश में पुलिस को अहम सुराग मिला है। आरोपी की आखिरी लोकेशन उत्तर प्रदेश के मथुरा में मिली है। हत्या के बाद वह रिटायर्ड आईएएस अग्रवाल का मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गया था। पुलिस के मुताबिक वरुण ने इसी मोबाइल में अपने नाम से खरीदी गई सबसे पुरानी सिम डालकर उसे चालू किया। मोबाइल की लोकेशन सामने आने के बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पंजाब पुलिस उसकी तलाश में जुटी हैं। 
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पुलिस जांच में सामने आया है कि वरुण कुमार ने अपने नाम से पांच मोबाइल सिम खरीदी थीं। पुलिस ने इन सभी सिम की गतिविधियों और लोकेशन को खंगाला है। जांच में यह भी सामने आया है कि वरुण की आगरा में रहने वाले एक व्यक्ति से गहरी दोस्ती थी। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। आरोपी के पुराने ठिकानों और संपर्कों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

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दस महीने पहले घर छोड़ चुका था 
जांच में वरुण के पारिवारिक विवाद की जानकारी भी सामने आई है। उसके पिता गब्बर ने पुलिस को बताया कि वरुण करीब 10 महीने पहले ही घर छोड़कर चला गया था और उसके बाद परिवार से उसका कोई संपर्क नहीं रहा। गब्बर की तीन शादियां हुई हैं। वरुण पहली पत्नी का बेटा है, जिसकी मृत्यु हो चुकी है। दूसरी पत्नी से कोई संतान नहीं हुई। इसके बाद गब्बर ने अपने साले की पत्नी से तीसरी शादी की। बताया गया है कि वह महिला को अपने साथ लेकर आया था, जिसके कारण परिवार में विवाद और कलह की स्थिति बनी रही।

नौकरों से पूछताछ के बाद जांच वरुण पर ही टिकी
आईएएस राकेश अग्रवाल के यहां पहले काम कर चुके तीन नौकर भी पुलिस के रडार पर थे। नौकरी छोड़कर जा चुके इन तीनों लोगों को थाने बुलाकर पूछताछ की गई, लेकिन उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। इसके बाद पुलिस की जांच का फोकस मुख्य रूप से वरुण कुमार पर केंद्रित हो गया है। 

जहां नौकरी की, वहीं वारदात भी की
पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि वरुण मध्य प्रदेश के अलावा कर्नाटक और राजस्थान में भी काम कर चुका है। जहां-जहां उसने काम किया, वहां भी उस पर मोबाइल लेकर भागने या किसी व्यक्ति से नकदी लेकर फरार होने के आरोप सामने आए हैं। पुलिस अब उसके पुराने ठिकानों, संपर्कों और काम के दौरान जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।

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अग्रवाल का भदभदा विश्राम घाट में अंतिम संस्कार
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल का शुक्रवार को भोपाल के भदभदा विश्राम घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। अमेरिका से आए उनके बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी। गांधी मेडिकल कॉलेज से शव को रातीबड़ क्षेत्र के सूरज नगर स्थित सेवनिया गौड़ के बंगले पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। यहां से अंतिम यात्रा भदभदा विश्राम घाट पहुंची। अंतिम संस्कार में वर्तमान और पूर्व नौकरशाही के कई अधिकारी मौजूद रहे।

26 सितंबर को नौकरी पर आया था वरुण
राकेश अग्रवाल की हत्या रातीबड़ थाना क्षेत्र के सूरज नगर स्थित सेवनिया गौड़ में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात हुई थी। अग्रवाल 1982 बैच के सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी थे। पुलिस के अनुसार, वरुण कुमार को 26 सितंबर को ही वर्मा होम केयर कंपनी के माध्यम से केयरटेकर के रूप में नौकरी पर रखा गया था। हत्या के बाद फरार होते समय वरुण अग्रवाल का मोबाइल भी अपने साथ ले गया था। पुलिस के मुताबिक, भोपाल से निकलने की कोशिश के दौरान वह लोगों से रेलवे स्टेशन जाने का रास्ता पूछता हुआ भी देखा गया था। रात करीब ढाई बजे तक उसकी शहर में मौजूदगी के सुराग मिले थे। इसके बाद उसकी गतिविधियों का पता लगाने में पुलिस ने मोबाइल और सिम की तकनीकी जांच शुरू की, जिसमें अब मथुरा की लोकेशन सामने आई है। 
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