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भोपाल: विमर्श कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, कहा- जनता की आवाज उठाने के लिए लोगों ने मुझे तालिबानी करार दे दिया

Sat, 22 Jan 2022 04:21 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति की धुरी कहे जाने वाल दिग्विजय सिंह ने देश की राजनीति और पत्रकारिता पर खुलकर विचार रखे। बता दें कि बेबाकी से अपनी बात रखने वाले दिग्विजय सिंह पर सीएम हाउस पर धरना देने के मामले में एफआईआर हुई है।
 
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दिग्विजय सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति की धुरी कहे जाने वाल दिग्विजय सिंह ने देश की राजनीति और पत्रकारिता पर खुलकर विचार रखे। बता दें कि बेबाकी से अपनी बात रखने वाले दिग्विजय सिंह पर सीएम हाउस पर धरना देने के मामले में एफआईआर हुई है।
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सेंट्रल इंडिया प्रेस क्लब के विमर्श कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं राजगढ़ का सांसद रहा, वहां की जमीन डेम में डूब रही थी। वहां के लोगों की आवाज उठाना जुल्म है क्या। अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग मुआवजा दिया जा रहा है, पट्टे वाले किसानों को अवैध कब्जा बताकर मुआवजा नहीं दिया जा रहा। आज अधिकारी तक फ़ोन नही उठाते, चिट्ठियों का जवाब तक नही देते। लेटर की रसीद तक नहीं देते। मेरे पास डेढ़ महीने की बातचीत का पूरा रिकॉर्ड है। डेढ़ महीनों से सीएम से मिलने की कोशिश कर रहा था। जनता की आवाज उठाने के लिए भी लोगों ने मुझे तालिबानी करार दे दिया। कल मेरे साथ धरने पर आधे से ज्यादा लोग भाजपा के बैठे थे। मुख्यमंत्री के कार्यालय के लोग उन्हें पूरी जानकारी नही देते। या तो आपके अधिकारी झूठ बोलते हैं या आप झूठ बोलते हो।

पूर्व सीएम ने कहा कि आज देश में अंग्रेजी शासन जैसी स्थिति हो गई है। पहले जो सरकार के खिलाफ लिखता था जेल जाता था। आज जो सरकार के खिलाफ कुछ कह दे, तो उस पर बज्रपात होना तय है। मैं जब मुख्यमंत्री था तो बहुत लोग मेरे खिलाफ लिखते थे, लेकिन में बुरा नही मानता था। निष्पक्ष पत्रकारिता वही होती है, जो देश सरकार को राह दिखाए।

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राजनेताओं को आलोचना से डरना नहीं चाहिए
दिग्विजय सिंह ने कहा कि आलोचना अगर आप सहन नहीं कर सकते हैं तो आप राजनीति में क्यों आए, मत आइए। राजनेताओं को आलोचनाओं से कभी डरना और नाराज नहीं होना चाहिए। सही रास्ते पर चलना है तो निंदकों को सुनना पड़ेगा। लेकिन आज निष्पक्ष पत्रकारिता में रोजी रोटी का सवाल हो गया है । गुजराती मानसिकता ऐसी है।

लोकतंत्र नहीं फासिज़्म है
सिंह ने कहा कि आज सरकारी विज्ञापन पर आधारित मीडिया हाउस हो गए हैं। अगर आप सरकारी विज्ञापन पर आधारित और निर्भर हैं तो आप निष्पक्ष पत्रकारिता कैसे कर पाएंगे। यह लोकतंत्र नही फासिज़्म है। पत्रकार वही बने जो भूखे पेट स्पष्ट तरीके से अपनी बात कह सकता है, जो भूखे पेट नहीं रह सकता वो निष्पक्ष पत्रकारिता नहीं कर सकता। आज अगर आप प्रधानमंत्री से सवाल पूछ लो, तो आप देश के लिए खतरा बन सकते हैं। कहा जा रहा है कॉमेडियन आज देश के लिए खतरा बन गए हैं। आज छोटी-छोटी बातों पर NSA लगा दिया जाता है। शर्मिंदगी की बात है कि आजादी के इतने सालों बाद भी हम NSA खत्म नहीं कर पाए। कई चैनल्स में से बड़े-बड़े पत्रकारों को इसलिए हटा दिया गया, क्योंकि हुकूमत को उनका न्यूज़ देना और उनकी पत्रकारिता पसंद नहीं थी।

आज खुलेआम धर्म के नाम पर वोट मांगा जा रहा
प्रावधानों नियमों का प्रयोग हुकूमत अपनी तरह से करे यह ठीक नहीं। क्या आज हमारे संवैधानिक संस्थान प्रभावित नहीं हो रहे। आज विरोधियों को एन्टी नेशनल राष्ट्र विरोधी ओर दुश्मन करार दे दिया जाता है और  दुश्मनों के खिलाफ खड़ा होना राष्ट्रवाद घोषित कर दिया गया है। चुनाव में धर्म के नाम पर वोट मांगना, डिसक्वालीफाइ हो जाता है, लेकिन आज खुलेआम धर्म के नाम पर वोट मांगा जा रहा है, कोई कार्यवाही नहीं हो रही । राजनीति में धर्म का प्रयोग गैर कानूनी है। जब तक हम लोग दूसरों के धर्मों को स्वाकार नहीं कर लेंगे, तब तक भारत में लोकतंत्र का भविष्य अच्छा नहीं है।
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