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Bhind: आजादी के योद्धा कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया पर फिल्म की स्क्रीनिंग, मनोज बाजपेयी ने दिया खास योगदान

Sun, 12 May 2024 04:15 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंड

सार

Bhind: चंबल घाटी के महानायक कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया की स्मृति को ताजा करने को लेकर चंबल म्यूजियम की ओर से उन पर बनी एक खास दस्तावेजी फिल्म ‘कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया चंबल के महानायक’ की स्पेशल स्क्रीनिंग की गई। इस फिल्म में बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर मनोज बाजपेयी ने अपनी आवाज दी है।
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मनोज बाजपेयी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समर राज द्वारा बनाई गई फिल्म ‘कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया चंबल के महानायक’ की स्क्रीनिंग से पहले चंबल संग्रहालय परिवार की तरफ से कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया को नमन किया गया। दस्तावेजी लेखक डॉ. शाह आलम राना ने बताया कि कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया ने आजाद हिन्द फौज की तरह चंबल घाटी में हजारों क्रांतिकारियों को फिरंगी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए सशस्त्र क्रांति का सबसे उम्दा प्रयोग किया था।

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करो या मरो आंदोलन के दौरान कमांडर को 44 वर्ष की सजा हुई और वे करीब 52 बार जेल गए। आजाद भारत में कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया इटावा से  तीन बार लोकसभा सांसद चुने गए। जनपद में शैक्षिक पिछड़ेपन की समस्या, आवागमन के लिए पुलों का आभाव जैसी तमाम सरोकारी समस्याओं को प्रमुखता से उठाते रहे। डॉक्टर राना ने कमांडर साहब पर बनी फिल्म को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे कमांडर साहब के जीवन के तमाम पहलुओं को लोग अच्छी तरह समझ सकेंगे और प्रेरणा ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस फिल्म में मनोज बाजपेयी के नैरेशन के सहारे प्रोफेसर आनंद कुमार, सुधींद्र भदौरिया, केसी त्यागी, प्रोफेसर अभय कुमार दुबे और खुद उनकी यानी डॉ.शाह आलम राना की बातचीत है।

गौरतलब है कि चंबल संग्रहालय की स्थापना सितंबर 2018 में हुई थी चंबल म्यूजियम समाज में बिखरे अमूल्य ज्ञान स्रोत सामग्री सहेजने के मिशन में जुटा है, सांस्कृतिक व बौद्धिक संपदा के संरक्षण के क्रम में चंबल अंचल और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, पत्र, गजेटियर, डाक टिकट, सिक्के, स्मृति चिन्ह, समाचार पत्र, पत्रिकाएं, पुस्तकें, तस्वीरें, वीडियो, पुरस्कार, सामग्री-निशानी, अभिनंदन ग्रंथ, पांडुलिपि आदि ऐतिहासिक महत्व और लोकजीवन से जुड़ी प्राचीन सामग्री संरक्षित की गई है। इन ज्ञानकोष से जहां चंबल संग्रहालय और समृद्ध हुआ है वहीं शोधार्थियों के लिए बीहड़ में एक खिड़की खुली है।

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