मध्य प्रदेश में आदिवासी कल्याण के नाम पर जारी करोड़ों रुपये के बजट और जमीनी बदहाली को लेकर एक बार फिर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राज्य की मोहन यादव सरकार को घेरते हुए आदिवासियों के विकास दावों पर तीखे सवाल उठाए हैं।
पटवारी ने मांग की है कि सरकार को आदिवासी जिलों के 'बजट बनाम भ्रष्टाचार' की हकीकत को उजागर करने के लिए एक श्वेत-पत्र जारी करना चाहिए।
पटवारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विकास कार्यों में 90% तक भ्रष्टाचार हो रहा है।
करोड़ों रुपये का सरकारी बजट जनता तक पहुंचने से पहले ही सिस्टम की भेंट चढ़ जाता है। उन्होंने विशेष रूप से राज्य की चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं पर निशाना साधा और कहा कि पिछले 25 वर्षों में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बेअसर साबित हुई है। आदिवासी अंचलों में डॉक्टरों की भारी कमी है, जिसके कारण सुदूर गांवों में बुनियादी इलाज भी नसीब नहीं हो रहा है।
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कहने को तो हर साल आदिवासी उत्थान के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया जाता है लेकिन हकीकत यह है कि इन क्षेत्रों में आज भी टीकाकरण सुचारू रूप से नहीं हो पाता और कुपोषण की समस्या जस की तस बनी हुई है। सरकार अपनी पीठ थपथपाने और वाहवाही लूटने में व्यस्त है, जबकि जमीनी हकीकत में आदिवासी समुदाय मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब बजट में कोई कमी नहीं है, तो योजनाएं धरातल पर नाकाम क्यों हो रही हैं?
बता दें कि आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बालाघाट पहुंच रहे हैं। वे यहा जागला गांव में मृत बच्चों के पीड़ित परिवारों से मिलेंगे। मध्य प्रदेश में 13 दिन के भीतर राहुल गांधी का यह दूसरा दौरा है। इन आदिवासी बच्चों की मौत को लेकर राहुल ने ट्वीट करके कहा था कि भाजपा की उपेक्षा के कारण आदिवासी परिवारों ने मासूमों को खोया है। उन्होंने कहा कि वे हर संघर्ष में आदिवासियों के साथ हैं।
अब आज इन पीड़ित परिवारों के परिजनों से मिलने के लिए राहुल गांधी बालाघाट पहुंच रहे हैं, जिसे लेकर भाजपा और कांग्रेस में सियासती जंग छिड़ गई है।