राजनीति में कुछ किस्से ऐसे होते हैं जिन पर यकीन करना मुश्किल होता है। कुछ इसे अंधविश्वास कहते हैं तो कुछ मान्यता। मध्यप्रदेश के देवास जिले की बागली को लेकर ऐसी ही मान्यता है जिसके बारे में कहा जाता है कि जो भी मुख्यमंत्री चापड़ा-बागली मार्ग से होता हुआ बागली पहुंचता है वह दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बन पाता।बागली में किसी मुख्यमंत्री को चुनावी सभा किए 23 साल बीत चुके हैं। आखिरी बार दिग्विजय सिंह ही बागली पहुंचे थे और वे 2003 के बाद मुख्यमंत्री नहीं बन पाए।
23 साल बीत गए, नहीं हुई किसी सीएम की चुनावी सभा
बागली में बतौर मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अंतिम बार गांधी चौक पर चुनावी सभा को संबोधित किया था। मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बतौर मुख्यमंत्री पहली बार निजी प्रवास पर वर्ष 2013 में राजपरिवार के निवास गढ़ी में आ चुके हैं लेकिन उन्होंने दूसरा मार्ग चुना था। चुनावी सभा के लिहाज से देखें तो 23 साल से यहां किसी सीएम की सभा नहीं हुई है।
हनुमानजी महाराज से जुड़ी है मान्यता
इस मान्यता को लोग बागली के खेड़ापति हनुमान महाराज से जोड़ते हैं। चर्चा है कि जो भी मुख्यमंत्री बागली-चापड़ा मुख्य मार्ग से बागली आता है वह सीएम की कुर्सी पर दोबारा नहीं बैठ पाता। हनुमान के दरबार में हाजिरी देने वालों में स्व. मुकेश व अभिनेता शम्मी कपूर सहित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अर्जुनसिंह व कैलाश जोशी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नाम शामिल रहे।
कुछ लोगों का मानना है कि मुख्य बाजार में छत्रपति हनुमानजी विराजित हैं, इसलिए जो भी मुख्यमंत्री यहां पर बागली-चापड़ा मुख्य मार्ग से होकर आता है उसे दोबारा मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं मिलती है क्योंकि भगवान यहां पर छत्रपति के नाम से विराजित हैं। पिछले 20 वर्षों में दिग्विजय सिंह इसके उदाहरण हैं। पं. द्वारका प्रसाद मिश्र का नाम भी लिया जाता है। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने बागली में एक सभा को संबोधित किया था, इसके बाद सरकार गिर गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह, दिग्विजय सिंह व कैलाश जोशी का भी उदाहरण दिया जाता है।
आखिरी बार दिग्विजय सिंह ने की थी सभा
वर्ष 1998 में दिग्विजय सिंह मप्र के मुख्यमंत्री थे। चुनाव के दौरान उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में गांधी चौक पर एक चुनावी सभा को संबोधित किया था। साथ ही छत्रपति हनुमानजी मंदिर में दर्शन भी किए थे। बाद में वर्ष 2003 के बाद कांग्रेस सरकार चली गई और भाजपा सरकार बनी।
2013 में दूसरे मार्ग से बागली पहुंचे थे सीएम
वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बागली की रानी स्व. भगवतकुमारी सिंह के पगड़ी कार्यक्रम में शमिल होने के लिए आए थे। यह निजी प्रवास था। शुरुआत में उनके हेलिकॉप्टर के लिए बागली-चापड़ा मुख्य मार्ग पर उत्कृष्ट विद्यालय के सामने की खाली जमीन पर हेलीपैड बनाया जाना था। लेकिन अचानक कार्यक्रम बदला और फिर हेलीपैड जटाशंकर मार्ग पर एक खेत में बनाया गया। ठेकेदार से रातों-रात जटाशंकर मार्ग का आधा निर्माण पूर्ण करवाया था। तब भी चर्चा हुई थी कि कहीं कुर्सी जाने के भय से तो मार्ग नहीं बदला गया।
पिछले दिनों सतवास पहुंचे थे सीएम शिवराज
वर्तमान समय की बात करें तो मप्र की खंडवा लोकसभा में उपचुनाव है। बागली विधानसभा खंडवा संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आगमन था लेकिन वे बागली नहीं गए बल्कि सतवास पहुंचे। रोड शो और सभा को संबोधित किया। बागली को जिला बनाने की मांग भी चल रही है और सीएम घोषणा कर चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके अलावा नर्मदा सिंचाई आंदोलन को लेकर भी बागली चर्चा में रहा है। लोगों को लगा था कि सीएम बागली आएंगे और उन्हें आश्वस्त करेंगे लेकिन सीएम सतवास से ही निकल गए।
बागली से चुनाव लड़ते थे पूर्व सीएम जोशी
बागली विधानसभा वह सीट है जहां से मप्र के मुख्यमंत्री रहे कैलाश जोशी चुनाव लड़ते थे। वे रिकॉर्ड बार यहां से जीते। उनके बाद उनके बेटे दीपक जोशी भी इस सीट से चुनाव लड़े। बाद में सीट अजजा वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। डीएसपी रह चुके पहाड़ सिंह कन्नौजे (भाजपा) इस सीट से विधायक हैं।
उज्जैन में भी है ऐसी मान्यता
मप्र के उज्जैन के बारे में भी ऐसी ही मान्यता है। कहा जाता है कि यहां मुख्यमंत्री रात में नहीं रूकते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि उज्जैन के राजा महाकाल है और उनके सामने दूसरा कोई राजा यहां नहीं रूक सकता।