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MP News: अनूपपुर का यह आदिवासी गांव है मोरों का बसेरा, सुबह-शाम होता है मोर का दीदार

Thu, 18 Jan 2024 02:16 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर

सार

अनूपपुर जिले का एक गांव है टांकी। बैगा आदिवासी समुदाय की बहुतायत वाला। यहां पर राष्ट्रीय पक्षी मोर गांव के परिवार का हिस्सा बन चुके हैं। सुबह-शाम मोरों को गांवों के आंगन में चहलकदमी करते देखा जा सकता है।
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टांकी गांव में विचरण करता मोर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के जनपद अनूपपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत टांकी के बैगा जनजातीय समाज के बीच भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर आदिवासी समाज को अपना परिवार माना जाता है। यही वजह है कि मोर दिनभर उनके बीच विचरण करते हैं। टांकी गांव मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जंगलों से घिरा है। इन जंगलो में राष्ट्रीय पक्षी मोर का बसेरा है। शाम होते ही राष्ट्रीय पक्षी जंगल की ओर चले जाते हैं। सुबह होते ही आदिवासी समाज के बीच पहुंचकर एक परिवार की तरह दिनभर विचरण करते रहते हैं। 

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मोर हमारे परिवार का हैं हिस्सा 
गांव के ही रहने वाले जयलाला ने बताया कि जंगल से मोर रोजाना हमारे गांव मे आते हैं। सभी ग्रामीण पक्षी को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। ग्रामीण सुबह-सुबह मोर के लिए अपने घर के सामने तथा पीछे चने, चावल, दाल, मकाई सहित अन्य दाने डाल देते हैं। ग्रामीणों के लिए यह दिनचर्या का हिस्सा है। शाम होते ही मोर जंगल की ओर लौट जाते हैं। कुछ ग्रामीणों ने यह भी बताया कि मोर ग्रामीणों से खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि जिस जगह पर मोर का आना-जाना होता है तथा उसकी आवाज की गूंज से उस जगह पर सर्प का खतरा नहीं रहता है। 

वन विभाग भी करता है निगरानी 
जिले के कोतमा रेंज के बीट टांकी के प्रभारी वन रक्षक शंकर सिंह ने बताया कि हमारे बीट में राष्ट्रीय पक्षी मोर पाए जाते हैं। ग्रामीण और राष्ट्रीय पक्षी के बीच गजब का रिश्ता है परंतु इसके बाद भी वन विभाग रोज राष्ट्रीय पक्षी मोर की सुरक्षा के लिए निरंतर मॉनिटरिंग करता है। 

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