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व्यापमं से भी बड़ा घोटाला, 60 सेकेंड में 30 प्रोफेसरों की नियुक्ति

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घोटालों का गढ़ बनते जा रहे मध्यप्रदेश के भोपाल में व्यापमं जैसा एक और बड़ा घोटाला सामने आता दिख रहा है। आलम ये है कि घोटाला करने वालों ने व्यापमं की रफ्तार को भी पीछे छोड़ दिया है।
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भोपाल की बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी में हुए इस घोटाले में मात्र 60 सेकेंड में 30 प्रोफेसरों और अस्सिटेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति कर दी गई। चहेतों को नौकरी देने के लिए ऐसा खेल रचा गया कि लिखित परीक्षा भी लेनी जरूरी नहीं समझी गई।

इससे भी दो कदम आगे बढ़कर 9 साल के जरूरी अनुभव की पात्रता को घटाकर मात्र 6 साल कर दिया गया। वहीं मामले की शिकायत अब राजभवन तक पहुंच गई है। जिसके बाद राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी के कुलपति से जवाब तलब कर लिया है।
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तीन दिन में निपटा ‌दिए गए 700 आवेदकों के इंटरव्यू

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार भोपाल की बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी के लिए बीते साल प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसरों के 30 पदों के लिए विज्ञप्ति निकाली गई ‌थी। जिसके बाद सितंबर में यूनिवर्सिटी ने आवेदकों के इंटरव्यू लेने शुरू किए।

बताया जाता है कुल 700 उम्‍मीदवारों ने इन पदों के लिए आवेदन किया। यहीं से इस नियुक्ति में घोटाले के बीज पड़ गए। सभी उम्‍मीदवारों के इंटरव्यू तीन दिन में निपटा ‌दिए गए।

चयन समिति ने प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए इंटरव्यू में आवेदकों को मात्र एक से दो मिनट का समय दिया। आरोप है कि अपनों को ही रेवडियां बांटने के लिए 9 साल अनुभव की योग्यता को खत्म करके मात्र 6 साल कर दिया गया।
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राज्यपाल तक पहुंची शिकायत, कुलपति तलब

इंटरव्यू के लिए ऐसी आपाधापी मची कि कुछ पुरुष उम्मीदवारों ने महिला कोटे में भी इंटरव्यू दे डाले। हैरानी की बात यह रही कि ये सब कुलपति एमडी तिवारी की अध्यक्षता में बनी चयन समिति की निगरानी में हुआ।

इस सारे गोरखधंधे की शिकायत राज्य के उच्च शिक्षा विभाग तक पहुंची तो पहले से ही व्यापमं की आंच झेल रही सरकारी मशीनरी आनन फानन हरकत में आ गई। मामले की अंदरखाने जांच हुई तो सारे आरोप सही निकले।

क्योंकि मामला विश्वविद्यालय से जुड़ा था और इसमें कुलपति की संलिप्तता नजर आ रही थी और उच्च शिक्षा विभाग उनके खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम नहीं था इसलिए इसकी शिकायत राज्यपाल से की गई। हालांकि प्रदेश सरकार ने कार्रवाई करते हुए विश्‍वविद्यालय के रविजस्ट्रार लोनू सिंह सोलंकी को सस्पेंड कर दिया गया है।

राज्यपाल ने भी इस पूरे मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए कुलपति से जवाब तलब कर लिया है।
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