विधायक से नहीं थी ऐसी उम्मीद, जमानत निरस्त
सीजेएम अदालत ने आकाश विजयवर्गीय को जमानत देने से मना करते हुए कहा कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं की जा सकती। अभियुक्त एक प्रभावशाली व्यक्ति है। इस स्थिति में उनके द्वारा साक्षियों को डराए-धमकाए जाने की संभावना से मना नहीं किया जा सकता। उनका कृत्य समाज के लिए हितकारी नहीं है। यदि उन्हें जमानत मिली तो वह सरकारी काम करने वाले अधिकारी डरेंगे।
पुलिस ने जमानत पर जताई आपत्ति
बुधवार शाम के चार बजे आकाश को पुलिस जिला व सत्र न्यायालय लेकर पहुंची। जहां उनके वकील जमानत अर्जी को लेकर तैयार थे। उन्हें न्यायमूर्ति डॉ. गौरव गर्ग की अदालत में पेश किया गया। उनके वकील ने कहा कि पुलिस ने दबाव में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है। निगम अधिकारी बिना अनुमति के वहां पर कार्रवाई करने के लिए गए थे। केस दर्ज करने से पहले उनका पक्ष तक नहीं सुना गया।
पुलिस ने आकाश की जमानत याचिका पर आपत्ति दर्ज की। पुलिस ने कहा कि विधायक ने शासकीय सेवक के साथ मारपीट की, अपशब्द कहे, सरकारी काम में बाधा भी पहुंचाई। उनके खिलाफ जिन धाराओं में केस दर्ज किया गया है उनमें जमानत देने का अधिकार नहीं है। ऐसे मामलों में यदि जमानत मिलती है तो इससे सरकारी अफसर, कर्मचारियों का मनोबल गिरेगा। नगर निगम ने भी आकाश की जमानत का विरोध किया। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने जमानत देने से मना कर दिया।