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एमपी: सर्वपितृमोक्ष शनिचरी अमावस्या पर ओंकारेश्वर में उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब, गया शिला में होगा पिंडदान

Thu, 08 Oct 2026 07:07 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर

सार

सर्वपितृमोक्ष शनिचरी अमावस्या पर ओंकारेश्वर में हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। नर्मदा स्नान, पिंडदान और श्राद्ध-तर्पण के लिए गया शिला विशेष महत्व रखता है। प्रशासन ने भीड़, यातायात और घाटों की सुरक्षा को लेकर व्यवस्थाएं की हैं।

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पिंडदान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सर्वपितृमोक्ष शनिचरी अमावस्या के अवसर पर ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। अमावस्या से एक दिन पहले शुक्रवार से ही मालवा और निमाड़ अंचल के विभिन्न जिलों से श्रद्धालुओं के ओंकारेश्वर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। लोग बस, कार और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से यहां पहुंचेंगे।

शाजापुर, शुजालपुर, मक्सी, देवास, ब्यावरा, राजगढ़, सोनकच्छ, उज्जैन, तराना, आगर-मालवा, इंदौर के अलावा खंडवा और खरगोन से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालु नर्मदा स्नान, पिंडदान, श्राद्ध-तर्पण और ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे।

चौदस की रात घाटों पर होंगे धार्मिक अनुष्ठान

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चौदस की शाम से ही नर्मदा तट के विभिन्न घाटों पर धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। गोमुख घाट, केवलराम घाट, नागर घाट, अभय घाट, महानिर्माणी घाट, चक्रतीर्थ घाट और कोटीतीर्थ घाट पर श्रद्धालु अनुष्ठान करेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु स्थानीय बड़वा और भोपा के साथ ढोल-नगाड़ों, तलवारों और जंजीरों के साथ घाटों पर पहुंचते हैं। मान्यता है कि इन धार्मिक क्रियाओं से बाहरी बाधाएं और संकट दूर होते हैं।

श्रद्धालुओं का कहना है कि अमावस्या के दिन अत्यधिक भीड़ होने के कारण वे एक दिन पहले ही धार्मिक अनुष्ठान पूरा कर लेते हैं। इसके बाद अमावस्या के दिन नर्मदा स्नान और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के बाद उज्जैन जाकर महाकालेश्वर के दर्शन करने की परंपरा भी है।

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गया शिला में पिंडदान का विशेष महत्व

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ओंकारेश्वर तीर्थ क्षेत्र में नर्मदा नदी के उत्तर तट पर कावेरी नदी के उत्तरी किनारे स्थित हजारों वर्ष पुराना गया शिला स्थान पितृ कर्म के लिए विशेष महत्व रखता है। सर्वपितृमोक्ष अमावस्या पर यहां पिंडदान और श्राद्ध-तर्पण का महत्व बिहार के गयाजी के समान माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य एवं कथा-पुराण वाचक पंडित अशोक दौलतराम दुबे के अनुसार, गया शिला का उल्लेख पद्म पुराण और नर्मदा पुराण में मिलता है। उनके अनुसार, पद्म पुराण में वर्णन है कि दुर्वासा ऋषि ने ओंकार तीर्थ में भगवान शिव की आराधना की थी। प्रसन्न होकर भगवान ओंकार ने इस तीर्थ को गया के समान होने का वरदान दिया। इसके बाद यहां गया जी के समान पिंडदान की परंपरा शुरू हुई।

उन्होंने बताया कि धार्मिक ग्रंथों में ओंकारेश्वर के गया शिला स्थान पर पितरों के लिए पिंडदान और श्राद्ध-तर्पण का उल्लेख मिलता है। नर्मदा पुराण के 111वें अध्याय में भी ओंकारेश्वर तीर्थ क्षेत्र के विभिन्न स्थानों के साथ गया शिला का उल्लेख किया गया है और यहां पिंडदान व श्राद्ध की परंपरा बताई गई है।

पंडित दुबे के अनुसार, गया शिला स्थान पर पितृ पक्ष के अलावा प्रत्येक महीने चतुर्दशी और उसके अगले दिन अमावस्या पर भी पितृदोष निवारण के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। उनका कहना है कि देश के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पितृ कर्म कराने पहुंचते हैं।

प्रशासन ने संभाली व्यवस्थाओं की कमान
श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाएं संभाल ली हैं। पुनासा एसडीएम आईएएस पंकज वर्मा ने ओंकारेश्वर में डेरा डालकर व्यवस्थाओं की कमान संभाली है। डिप्टी कलेक्टर मुकेश काशिव के अनुसार, शुक्रवार और शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर्मदा स्नान और मंदिर दर्शन के लिए पहुंचेंगे।

तहसीलदार उदय मंडलोई ने बताया कि श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी नगर परिषद को सौंपी गई है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए खतरनाक घाटों पर स्नान पर रोक लगाई गई है। ओंकारेश्वर थाना प्रभारी अनूप सिंधियान ने बताया कि पुराने बस स्टैंड से आगे सभी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है। दोपहिया वाहनों की पार्किंग बालवाड़ी क्षेत्र में और छोटे वाहनों की पार्किंग कुबेर भंडारी मंदिर के पास कराई गई है। मोरटक्का से ओंकारेश्वर तक यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस जवानों की तैनाती की गई है।

शनिवार को सर्वपितृमोक्ष शनिचरी अमावस्या पर श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। इस दौरान नर्मदा स्नान, पिंडदान, श्राद्ध-तर्पण, ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और ओंकार पर्वत की परिक्रमा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।

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