सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए संवाद जरूरी है। यही वो जरिया है जो कोविड से पैदा हुए हालात और बढ़ती लिंग आधारित हिंसा की सही रिपोर्टिंग में मददगार साबित होगा। इसके अलावा लड़कियों, महिलाओं को पहली सीटी, पहले थप्पड़, पहली बार उनके खिलाफ होने वाले अपराध पर आवाज उठानी होगी और कहना होगा ‘ना’। अमर उजाला यूनिसेफ की ओर से शुक्रवार को आयोजित वेबिनार में एडीजी यूपी और लखनऊ में मिशन शक्ति की नोडल अधिकारी रेणुका मिश्रा ने ये बातें कहीं।
मनोज कुमार राय
- फोटो : अमर उजाला
‘लिंग आधारित हिंसा और कोविड 19, उभरते मुद्दे और समाधान’ विषय पर आयोजित वेबिनार में निदेशक महिला कल्याण विभाग मनोज कुमार राय ने कहा कि सरकार और अधिकारी प्रयास करते हैं, कोशिशें जारी रहेंगी। इससे ज्यादा जरूरी है कि हर व्यक्ति खुद के मन-मस्तिष्क को मजबूत बनाएं। इसी से बदलाव की शुरुआत होगी।
आफताब मोहम्मद
- फोटो : अमर उजाला
यूनिसेफ के बाल संरक्षण विशेषज्ञ आफताब मोहम्मद ने कहा कि हिंंसा रोकना है तो पहले हमें ये अहसास कराना या करना होगा कि यदि हम पीड़िता की जगह हो तो कैसा लगेगा। सिस्टम को कोसने से कुछ नहीं होगा। इसके लिए खुद को ही पहल करनी होगी। हंसी तो फंसी, वो वैसी ही होगी, जैसी सोच को बदलने की जरूरत है।