लखनऊ। जिले में सोमवार को भी सरकारी केंद्रों पर धान खरीद की बोहनी नहीं हो सकी। किसी भी केंद्र पर किसान धान लेकर नहीं पहुंचे। सहकारी समिति के सचिवों और कर्मचारियों की हड़ताल से कई खरीद केंद्रों पर ताला भी लटका रहा। उधर, खरीद केंद्रों पर काम करने वाले पल्लेदारों को अब बायोमीट्रिक हाजिरी लगानी होगी।
लखनऊ में धान खरीद के लिए तीन एजेंसियों खाद्य विभाग, पीसीएफ और भारतीय खाद्य निगम के 30 केंद्र बनाए गए हैं। इसमें खाद्य विभाग के 11, पीसीएफ के 17 और खाद्य निगम के दो केंद्र शामिल हैं। इस बार धान का समर्थन मूल्य 2,441 रुपये है। जिले को 20 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य मिला है। सबसे अधिक 12 हजार मीट्रिक टन धान खरीदने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग को मिली है।
नमी और हड़ताल से प्रभावित हो रही खरीद
वेतन और अन्य मांगों को लेकर सहकारी समितियों के सचिव और कर्मचारी कई दिनों से ईको गार्डन में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। धान खरीद के कई केंद्र समितियों में ही बने हैं। सचिवों की हड़ताल से खरीद केंद्रों पर ताला लटक रहा है। हालांकि, डिप्टी आरएमओ विपुल सिन्हा खरीद का श्रीगणेश न होने का कारण नमी बता रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले माह हुई बारिश की वजह से धान में नमी है। इस बार कटाई भी लेट हुई है।
प्रत्येक केंद्र पर होंगे कम से कम चार पल्लेदार
खरीद केंद्रों पर किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए केंद्रों पर पल्लेदारों की मौजूदगी अनिवार्य की गई है। कम से कम चार पल्लेदार केंद्र पर मौजूद रहेंगे। इन पल्लेदारों को रोजाना बायोमीट्रिक हाजिरी लगानी होगी। हाजिरी न लगने पर केंद्र पर खरीद न होना माना जाएगा। पर्याप्त श्रमिक न होने पर हैंडलिंग ठेकेदार पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
धान खरीद नहीं शुरू हो पाई है।