शासन के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी कहते हैं कि डीएम व कमिश्नर की तैनाती में संख्या से ज्यादा तैनात होने वाला अधिकारी महत्वपूर्ण होता है। डीएम का दायित्व संवेदनशील होता है और सरकार की छवि उसी से बनती-बिगड़ती है।
आमतौर पर युवा आईएएस अधिकारी जिन्हें पहली या दूसरी बार जिले की कमान मिल रही होती है वे निर्विवाद छवि, पूर्ण कार्यक्षमता व पूरे जोश के साथ काम करते हैं। जिन प्रमोटी अफसरों में ये गुण नजर आते हैं, वे अपना स्थान बना ही लेते हैं। ऐसे में संख्या के हिसाब से इन पदों पर तैनाती का आकलन नहीं करना चाहिए। सरकार जिस अधिकारी को जहां उपयुक्त उपयोग समझती है, वहां तैनाती देती है।
इन्हीं जिलों में प्रमोटी आईएएस अधिकारी कलेक्टर
जिला नाम
चित्रकूट शेषमणि पांडेय
सीतापुर विशाल भारद्वाज
फर्रुखाबाद मानवेंद्र सिंह
बांदा आनंद कुमार सिंह-द्वितीय
गोंडा मार्कंडेय शाही
कानपुर देहात डॉ. दिनेश चंद्र-द्वितीय
सहारनपुर अखिलेश सिंह
उन्नाव रवींद्र कुमार-प्रथम
कन्नौज राकेश कुमार मिश्रा
लखीमपुर खीरी शैलेंद्र कुमार सिंह
बिजनौर रमाकांत पांडेय
शाहजहांपुर इंद्र विक्रम सिंह
गाजीपुर मंगला प्रसाद सिंह
अमरोहा उमेश मिश्रा
मुरादाबाद राकेश कुमार सिंह-द्वितीय
हमीरपुर ज्ञानेश्वर त्रिपाठी
अलीगढ़ चंद्रभूषण सिंह
गाजियाबाद अजय शंकर पांडेय
कासगंज चंद्र प्रकाश सिंह
पुलिस महकमे में भी 75 में से 23 जिलों में ही प्रांतीय पुलिस सेवा से प्रोन्नत अफसर तैनात हैं। एक समय था जब प्रदेश में आधे से अधिक प्रोन्नत अफसरों को जिलों में कप्तान की जिम्मेदारी दी जाती थी, लेकिन अब डायरेक्ट आईपीएस अफसरों को तरजीह दी जा रही है। वर्तमान में एक भी जोनल मुख्यालय वाले जिलों में प्रमोटी आईपीएस कप्तान नहीं है।