यहां उसकी बातचीत भवबियापुर टिकैत नगर बाराबंकी निवासी चौकीदार शिवाकांत से होती रहती थी। एक दिन चौकीदार ने उसका गांव पूछा तो उसने भवबियापुर बताया जिस पर चौकीदार ने पाश्चातवर्ती कर्मचारी को अवगत कराया। इसके बाद चौकीदार ने अपने गांव फोन कर जानकारी जुटाई और राम मिलन के परिवारीजनों से संपर्क किया।
बाल कल्याण समिति की सदस्य संगीता शर्मा ने बताया कि राम मिलन मानसिक रूप से थोड़ा सा कमजोर था और अपने घर का पता व माता-पिता का सही-सही नाम नहीं बता पाता था। उसे लेकर कई बार काउंसलिंग की गई। लेकिन अभी हाल में तैनात चौकीदार शिवाकांत भी राम मिलन के गांव भवबियापुर का निकल आया और उसने राम मिलन के परिवारीजनों को तलाशने में मदद की।
सदस्य संगीता शर्मा ने बताया, राम मिलन को 14 साल बाद परिवार के सुपुर्द कर दिया गया है। बेटे को देखकर एक बार में ही परिवार वाले पहचान गए। चाचा के गले में बाहें डालकर बहुत देर तक माता-पिता की सूरत निहारता रहा। परिवारीजन उसे देख प्यार करते हुए कह उठे अरे इतना बड़ा हो गया मेरा राम।