जितिन प्रसाद, नितिन अग्रवाल और संदीप सिंह।
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भाजपा ने योगी मंत्रिमंडल में युवाओं को मौका देकर भविष्य के लिए नई लीडरशिप तैयार करने का मार्ग प्रशस्त किया है। पार्टी की योजना है कि हर क्षेत्र के साथ प्रमुख जातियों के युवाओं को मंत्रिमंडल में देकर जगह आगामी 15-20 वर्ष के लिए नेतृत्व खड़ा किया जाए।
भाजपा ने बीते दो वर्ष से बसपा के जाटव वोट बैंक पर कब्जा जमाने का अभियान शुरू कर रखा है। जाटव समाज में पार्टी के पास बड़े नेता का अभाव होने के चलते पार्टी ने पूर्व एडीजी असीम अरुण को पहले विधानसभा चुनाव मैदान में उतारा और जीतने पर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया है। 51 वर्षीय असीम अरुण को पार्टी जाटव समाज के साथ समूचे दलित वर्ग के बड़े नेता के रूप में तैयार करना चाहती है।
पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद को ब्राह्मण चेहरे के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल किया है। बीते वर्ष कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए 49 वर्षीय जितिन को विधानसभा चुनाव में प्रचार का मौका देकर पार्टी की रीति नीति से अवगत कराने के साथ कार्यकर्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता बनाने का भी प्रयास किया। इसी तरह सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री नरेश अग्रवाल के बेटे नितिन अग्रवाल को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। पार्टी का प्रयास है कि वैश्य वर्ग में 40 वर्षीय नितिन को नए नेता के रूप में तैयार किया जाए।
वहीं, 30 वर्षीय संदीप सिंह दूसरी बार योगी सरकार का हिस्सा होंगे। उनके दादा स्वर्गीय कल्याण सिंह सिर्फ लोधी समाज के ही नहीं, बल्कि प्रदेश के बड़े नेता थे। पार्टी संदीप को मौका देकर नए लोध नेता के रूप में खड़ा करना चाहती है।
दयाशंकर सिंह यूं तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भाजयुमो का सफर तय करते हुए भाजपा की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। पार्टी ने इस बार उन्हें बलिया सदर से चुनाव लड़ाया और जीतने पर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया। 51 वर्षीय दयाशंकर को पार्टी क्षत्रिय समाज के साथ भाजपा के बड़े नेता के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है।
पार्टी के प्रदेश महामंत्री 51 वर्षीय जेपीएस राठौर को भी ब्रज क्षेत्र के साथ क्षत्रिय समाज के मजबूत नेता के रूप में तैयार करने के लिए सीधे राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। वहीं, 48 वर्षीय रजनी तिवारी को भी महिलाओं के बीच नई लीडरशिप तैयार करने के उद्देश्य से मंत्री बनाया गया है।