मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग की तारीफ करते हुए कहा कि संचारी रोग नियंत्रण में अच्छा कार्य कार्य किया है। यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन बनने के बाद अस्पतालों में दवाओं की कमी दूर हुई है।
टेलीमेडिसिन से दूरस्थ क्षेत्र के मरीजों को इलाज मिला है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस से 1.33 लाख से अधिक मरीजों को गोल्डन ऑवर में इलाज मिला है। बलरामपुर में केजीएमयू का सेटेलाइट सेंटर बन रहा है। लखनऊ का कैंसर संस्थान इलाज के लिए तैयार है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि पहले गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए गरीबों को कर्ज लेना पड़ता था, लेकिन अब आयुष्मान योजना के जरिये उन्हें मुफ्त इलाज की सुविधा मुहैया करा दी गई है। चिकित्सा राज्यमंत्री अतुल गर्ग ने कहा, आयुष्मान योजना विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है।
सीएम ने कहा, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस करने में पांच लाख रुपये भी खर्च नहीं होते हैं, जबकि निजी कॉलेजों में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। इस तरह सरकार ने विद्यार्थियों के करोड़ों रुपये बचाए हैं। इसलिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले हर विद्यार्थी से ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के लिए दो साल का बॉन्ड भरवाया जा रहा है। एमडी-एमएस करने वालों से एक साल का बॉन्ड भरवाया जा रहा है।
15 नए मेडिकल कॉलेज खोलेगी सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2016 तक प्रदेश में 12 मेडिकल कॉलेज थे। हमारी सरकार ने सात नए मेडिकल कॉलेज खोले और इनमें 700 सीटों पर एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करा दी है। आठ नए मेडिकल कॉलेज अगले सत्र में शुरू हो जाएंगे। इस तरह एमबीबीएस की 800 सीटें और बढ़ जाएंगी। जिला चिकित्सालयों को उच्चीकृत करके 14 नए मेडिकल कॉलेज बनाए जाएंगे।
वहीं, एक नया राज्यस्तरीय मेडिकल कॉलेज खोला जा रहा है। इस तरह हर दो जिलों के बीच एक मेडिकल कॉलेज हो जाएगा। एमबीबीएस करने के बाद एक साल इंटर्नशिप ग्रामीण क्षेत्रों की पीएचसी से भी कराई जाएगी।
आयुष्मान योजना की लाभार्थी दिव्या सिंह और मो. जाहिद ने समारोह में मंच से आपबीती सुनाई। लखनऊ की दिव्या ने बताया कि वह लकवा का शिकार हो गई थी और किस तरह आयुष्मान भारत योजना से एसजीपीजीआई में उसका मुफ्त इलाज हुआ। इस तरह ठाकुरगंज निवासी मो. जाहिद ने बताया कि इस योजना से उसने किडनी स्टोन का इलाज कराया। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया।
आयुष्मान योजना एक साल में
सूचीबद्ध सरकारी अस्पताल : 1,443
सूचीबद्ध निजी अस्पताल : 476
1.87 लाख मरीजों को पहुंचाया लाभ
211.70 करोड़ रुपये का अस्पतालों को हुआ भुगतान
कैंसर के 2,261 मरीज का इलाज
किडनी के 1,055 मरीज का इलाज
हृदय रोग के 787 मरीज का इलाज
रेडियोथेरेपी के 484 मरीजों का इलाज