योगी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सार्थक प्रयास नहीं किए गए तो यह किसी भी प्रदेश को मिट्टी में मिला सकती है। वहीं, यदि शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे प्रयास हुए तो ऊंचाई पर पहुंचा सकती है। स्कूल समिट में शिक्षाविद् शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों और नवाचार पर चिंतन कर प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता और व्यवस्था में सुधार का रोडमैप तैयार करेंगे।
सुविधाएं मिलें तो आगे का रास्ता बना लेंगे बच्चे
सीएम ने कहा कि यह सिस्टम की विफलता थी कि गांवों तक सुविधाएं नहीं पहुंचीं। स्कूली शिक्षा ठीक कर लेंगे तो आगे का रास्ता बच्चे खुद बना सकते हैं। चित्रकूट के एक स्कूल में तीसरी कक्षा की छात्रा के स्मार्ट क्लास में पढ़ने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गांव के बच्चों को बस सुविधाएं उपलब्ध करानी हैं, दिमाग तो उनके पास भी है।
उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में नवाचार और तकनीकी का उपयोग कर महज ढाई वर्ष में बड़ा परिवर्तन लाया गया है। वर्चुअल क्लासेज शुरू की जा रही हैं। ऑनलाइन लेक्चर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शिक्षकों के ऑनलाइन तबादले किए गए हैं।
स्कूल समिट में देश भर से आए शिक्षाविदों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रदेश में शिक्षा अच्छी है, वही तरक्की कर सकता है। प्रदेश में 220 दिन अनिवार्य रूप से स्कूलों का संचालन हो रहा है। माध्यमिक शिक्षा के 15 हजार शिक्षकों को संपर्क फाउंडेशन के जरिए प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पहले जहां यूपी बोर्ड की परीक्षाएं ढाई महीने तक चलती थीं, वह अब मात्र 14 दिन में होंगी। पिछली सरकारों के समय प्रदेश में नकल के टेंडर होते थे, अन्य प्रदेशों के साथ ही नेपाल, सऊदी अरब और श्रीलंका तक के विद्यार्थी यूपी बोर्ड की परीक्षा देने आते थे। विद्यार्थियों को आधार से लिंक किया गया और नकल पर शिकंजा कसने के बाद 13 लाख परीक्षार्थी कम हुए हैं।
परीक्षा को पूरी तरह नकलविहीन बना दिया गया है। मार्च 2017 से पहले पंद्रह वर्ष में 50 नए स्कूल नहीं खुले थे, योगी सरकार में दो वर्ष में 205 नए स्कूल खोले गए हैं। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने प्रदेश की बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में हुए सुधारों की जानकारी दी। सिफ्फी टेक्नोलॉजी के कमलनाथ, माध्यमिक शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला ने भी विचार रखे।