मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर साल में 90 दिन विधानसभा की कार्यवाही चली तो थानों और तहसीलों में होने वाली गड़बड़ियां खत्म हो जाएंगी। सरकारी मुलाजिमों को लग जाएगा कि अगर सही नहीं चले तो यह मुद्दा विधानसभा में उठ सकता है।
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पैसे लेकर सदन में सवाल पूछने की प्रवृत्ति पर चोट करते हुए कहा कि सदन के भीतर बात रखने के लिए किसी का कैरियर न बनें। सीएम ने अभी तक साल में 25-30 दिन ही विधानसभा चलने पर अफसोस जताया।
योगी आदित्यनाथ बुधवार को विधानभवन के तिलक हॉल में ‘उत्तर प्रदेश विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए प्रबोधन कार्यक्रम’ में मुख्य वक्ता थे। उन्होंने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को बहुत देर तक एक मंच पर बैठाना उतना ही मुश्किल है, जितना कि किसी मेढक को तराजू में तौलना।
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आज के कार्यक्रम में राज्यपाल राम नाईक भी निर्धारित समय से पांच मिनट पहले आ गए। जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए समयबद्धता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि 17वीं विधानसभा कीर्तिमान स्थापित करेगी। हमारे प्रदेश पर प्रकृति की असीम कृपा है, पर हमने उसका इस्तेमाल नहीं किया।
प्रतिशोध की भावाना से काम नहीं करेगी सरकार
सीएम आदित्यनाथ व राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री ने कहा, अगर विधानसभा के अंदर विधायकों का आचरण लोकतंत्र के अनुरूप रहा तो प्रदेश की तकदीर बदलनी तय है। विधानसभा सदस्यों को अपना आचरण लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप रखने की नसीहत देते हुए योगी ने कहा कि उनकी सरकार प्रतिशोध की भावना से कोई काम नहीं करेगी।
किसी के साथ अन्याय नहीं होगा, न ही किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत होगी। जाति, लिंग या मजहब के आधार पर भेदभाव का तो सवाल ही पैदा नहीं होगा।
विधायिका के सामने विश्वसनीयता बनाए रखने का संकट
सीएम ने कहा, आज विधायिका के सामने अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने का संकट खड़ा है। प्रत्येक पांच वर्ष पर जनता हमारे कामों का मूल्यांकन कर हमारा भविष्य तय करती है, ऐसा न्यायपालिका या कार्यपालिका के साथ नहीं है। फिर भी हम पर अंगुलियां उठती रहती हैं। यह बात दीगर है कि जज, जनरल और नौकरशाह रिटायरमेंट के बाद विधायिका का अंग बनना चाहते हैं।
नियम-कायदों के दायरे में रखें अपनी बात
- फोटो : amar ujala
योगी ने कहा कि सदन एक ऐसा मंच है, जहां आपकी कही हुई बातें आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेंगी। सदन के अंदर नियमों के दायरे में रहकर बात रखना और धैर्य न खोना यह किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
सीएम ने संसद के अनुभव रखते हुए कहा कि नियम-कायदों के दायरे में रहकर अपनी बात रखना ज्यादा प्रभावी होता है। क्षेत्र में कोई विपदा आने पर सबसे पहले विधायक मौके पर पहुंचते हैं, इसके बावजूद उन्हें जवाबदेह नहीं माना जाता। इसके पीछे सदन से अनुपस्थित रहना भी एक वजह है।
भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण भी जनता के बीच छवि ठीक नहीं बनती। गंदगी एक व्यक्ति फैलाता है, पर बदनाम सभी होते हैं। जनता के बीच जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता स्थापित हो, यही हमारा उद्देश्य है।
योगी ने कहा, मैं चाहता हूं कि संसद की तरह ही विधानसभा की कार्यवाही भी दिन-रात चले। विधानसभा अध्यक्ष से अनुरोध करूंगा कि इसकी अनुमति दें और सदस्यों के भोजन और जलपान की व्यवस्था भी करें।
उन्होंने नवनिर्वाचित सदस्यों से कहा कि वे विधानसभा को सुचारु रूप से चलाने में मदद दें और वे वादा करते हैं कि सदन में उठे मुद्दों के प्रति सरकार के साथ-साथ मंत्रियों को भी जवाबदेह बनाएंगे।
सदन में जो भी सवाल उठेंगे और उन पर विधानसभा अध्यक्ष जो भी आदेश करेंगे, उसका शत-प्रतिशत पालन होगा।